नयी दिल्ली, 23 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के उस फैसले पर रोक लगा दी, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को राकांपा नेता रामावतार जग्गी की 2003 में हुई हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
उच्च न्यायालय ने हाल ही में इस मामले में अमित जोगी को दोषी ठहराते हुए उन्हें जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था।
31 मई 2007 को एक निचली अदालत ने कहा था कि अभियोजन पक्ष 28 आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित करने में सफल रहा है।
हालांकि, अदालत ने दिवंगत अजीत जोगी द्वारा स्थापित जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के अध्यक्ष अमित जोगी को उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया था।
उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने अमित जोगी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा और कपिल सिब्बल की दलीलों पर गौर करते हुए उनकी दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगा दी।
पीड़ित परिवार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा और गोपाल शंकरनारायणन ने इस दलील का विरोध किया।
उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगाते हुए उच्चतम न्यायालय ने अमित जोगी की याचिका पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को नोटिस भी जारी किया।
अमित जोगी ने उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया था।
उच्च न्यायालय ने पिछले महीने सीबीआई की अपील पर उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बाद 2003 के हत्या मामले की सुनवाई दोबारा शुरू की थी।
इस मामले की शुरुआती जांच राज्य पुलिस ने की थी, जिसे बाद में सीबीआई को सौंप दिया गया। सीबीआई ने अमित जोगी सहित कई आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।
रामावतार जग्गी की चार जून 2003 को हत्या कर दी गई थी। उस समय अजीत जोगी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री थे।
भाषा गोला मनीषा
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