सूरजकुंड झूला हादसा: जान गंवाने वाले निरीक्षक को 2020 में मिला था पुलिस पदक, मेला जारी रहेगा

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सूरजकुंड झूला हादसा: जान गंवाने वाले निरीक्षक को 2020 में मिला था पुलिस पदक, मेला जारी रहेगा

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  • Publish Date - February 8, 2026 / 10:29 AM IST,
    Updated On - February 8, 2026 / 10:29 AM IST

(फाइल फोटो के साथ)

फरीदाबाद, आठ फरवरी (भाषा) हरियाणा के फरीदाबाद में आयोजित सूरजकुंड मेले के मैदान में एक विशाल झूला बीच हवा में टूटकर गिर गया, जिसके बाद लोगों को बचाने की कोशिश में ड्यूटी पर तैनात 58 वर्षीय पुलिस निरीक्षक जगदीश प्रसाद की जान चली गई।

हरियाणा के राज्यपाल ने 2019-20 में जगदीश को पुलिस पदक से सम्मानित किया था।

शनिवार शाम करीब छह बजे जब झूला अचानक झुककर जमीन पर गिरा, तब उसमें लगभग 19 लोग झूल रहे थे, जिनमें से 11 लोग घायल हो गए।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 1989 में हरियाणा सशस्त्र पुलिस में शामिल हुए और 36 साल की सेवा पूरी करने के बाद मार्च में सेवानिवृत्त होने वाले प्रसाद ने झूले में फंसे लोगों को बचाने की कोशिश में वीरता दिखाई लेकिन इस प्रक्रिया में वे गंभीर रूप से घायल हो गए, जिसके कारण उनकी मृत्यु हो गई।

इस बीच, जिला प्रशासन ने सूचित किया कि 39वां सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प महोत्सव रविवार को जारी रहेगा हालांकि आगे की जांच होने तक झूला क्षेत्र बंद रहेगा।

हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अजय सिंघल ने शनिवार रात को बहादुर निरीक्षक के लिए एक करोड़ रुपये के मुआवजे और उनके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की।

अधिकारी ने प्रसाद को शहीद का दर्जा देते हुए दूसरों की जान बचाने के प्रयास में अपने प्राणों का बलिदान देने वाले अधिकारी की सराहना की।

हरियाणा के पर्यटन मंत्री अरविंद शर्मा ने कहा कि घायल लोग अब खतरे से बाहर हैं।

अतिरिक्त उपायुक्त की अध्यक्षता में एक समिति इस दुर्घटना की जांच करेगी और अधिकारियों ने बताया कि झूला विक्रेता के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।

प्रसाद के अचानक निधन से मथुरा जिले के उनके पैतृक गांव डेंगरा में लोगों को गहरा सदमा लगा।

प्रसाद के परिवार में उनकी पत्नी, दो बेटियां व एक बेटा हैं और तीनों बच्चे अभी पढ़ाई कर रहे हैं और अविवाहित हैं।

प्रसाद के एक भाई प्रदीप शिक्षक हैं और अपने पिता सूरजमल और माता शांति देवी के साथ गांव में रहते हैं।

उनके दूसरे भाई सतीश चंद्र बल्लभगढ़ की एक रसायन फैक्टरी में काम करते हैं जबकि चंद्रभान सिंह फरीदाबाद की एक मोटर कंपनी में कार्यरत हैं।

प्रदीप ने बताया, “हमें शनिवार रात आठ बजे यह खबर मिली। उनकी (प्रसाद की) पत्नी सुधा अपनी दो बेटियों निधि व दीप्ति और बेटे गौरव के साथ सोनीपत पुलिस लाइंस के सरकारी आवास में रहती हैं। मेरे भाई को 2019-20 में राज्यपाल द्वारा पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था।”

सूरजकुंड मेले में झूले से जुड़ी यह तीसरी ऐसी दुर्घटना थी, जिससे आयोजकों के सुरक्षा दावों पर सवाल उठ रहे हैं।

वर्ष 2002 में एक मौत और 2019 में एक व्यक्ति के घायल होने के बावजूद शनिवार को एक अन्य हादसा हुआ।

वर्ष 2002 में सूरजकुंड मेले में एक युवक की झूले पर झूलते हुए मौत हो गई थी।

उस समय झूलों को कुछ वर्षों के लिए बंद कर दिया गया था।

वर्ष 2019 में एक दुर्घटना में एक युवक घायल हो गया, जिसके बाद झूलों को फिर से बंद कर दिया गया लेकिन उनसे होने वाली आय को ध्यान में रखते हुए उन्हें दोबारा शुरू कर दिया गया।

अधिकारियों के अनुसार, झूले लगाने के लिए सख्त नियम लागू हैं, जिसके लिए प्रतिदिन निरीक्षण करना आवश्यक है।

भाषा जितेंद्र सुरभि

सुरभि