‘तलाक-ए-हसन’ तलाक का वैध तरीका है, नए कानून के तहत तलाक का पंजीकरण हो: गुवाहाटी उच्च न्यायालय

Ads

‘तलाक-ए-हसन’ तलाक का वैध तरीका है, नए कानून के तहत तलाक का पंजीकरण हो: गुवाहाटी उच्च न्यायालय

  •  
  • Publish Date - September 11, 2026 / 01:54 PM IST,
    Updated On - September 11, 2026 / 01:54 PM IST

गुवाहाटी, 11 सितंबर (भाषा) गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने तलाक के पंजीकरण से संबंधित एक रिट याचिका का निपटारा करते हुए कहा है कि ‘तलाक-ए-हसन’ तलाक का एक वैध तरीका है और देश में इस पर कोई प्रतिबंध नहीं है।

अदालत ने एक याचिकाकर्ता को अपने तलाक का पंजीकरण कराने के लिए असम मुस्लिम विवाह एवं तलाक अनिवार्य पंजीकरण अधिनियम, 2024 के तहत बारपेटा क्षेत्र के विवाह एवं तलाक पंजीयक से संपर्क करने का निर्देश दिया।

न्यायमूर्ति अरुण देव चौधरी ने ‘तलाक-ए-हसन’ के जरिए दिए गए तलाक के पंजीकरण से संबंधित एक रिट याचिका पर सुनवाई के बाद मंगलवार को यह आदेश पारित किया।

याचिकाकर्ता के अनुसार, उसकी शादी 2016 में हुई थी। बाद में दोनों के बीच मतभेद पैदा हो गए और उसकी पत्नी ने कथित तौर पर 2018 में अपना ससुराल छोड़ दिया। दोनों के बीच सुलह कराने की कोशिशें भी सफल नहीं हुईं।

इसके बाद याचिकाकर्ता ने 22 मार्च, 26 अप्रैल और 27 मई 2026 को तीन अलग-अलग तारीखों पर ‘तलाक-ए-हसन’ दिया और फिर कानून के तहत तलाक के पंजीकरण के लिए संबंधित प्राधिकारी से संपर्क किया।

याचिकाकर्ता ने दलील दी कि ‘तलाक-ए-हसन’ पर कोई प्रतिबंध नहीं है और उसने इसकी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तलाक दिया है।

राज्य सरकार ने हालांकि अदालत से कहा कि 1935 के पुराने कानून को निरस्त किया जा चुका है और उसके तहत नियुक्त प्राधिकारी का पद भी समाप्त कर दिया गया है इसलिए उस व्यवस्था के तहत अब तलाक का पंजीकरण नहीं किया जा सकता।

न्यायमूर्ति चौधरी ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा दिया गया ‘तलाक-ए-हसन’, तलाक का वैध तरीका है और मौजूदा समय में देश में इस पर प्रतिबंध नहीं है।

हालांकि, अदालत ने 1935 के कानून के तहत बारपेटा में नियुक्त प्राधिकारी को तलाकनामा पंजीकृत करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया क्योंकि वह कानून निरस्त किया जा चुका है और उसके तहत सृजित पद भी समाप्त कर दिया गया है।

अदालत ने याचिकाकर्ता को 2024 के कानून के तहत संबंधित क्षेत्र के विवाह एवं तलाक पंजीयक से संपर्क करने का निर्देश दिया।

अदालत ने कहा कि पंजीयक को यह जांच करनी होगी कि याचिकाकर्ता ने वास्तव में तलाक दिया है या नहीं और उसे उसकी पहचान की पुष्टि करनी होगी। इसके बाद वह तय करेगा कि अधिनियम की धारा 12 के तहत तलाक का पंजीकरण किया जाना है या नहीं।

अगर पंजीकरण से इनकार किया जाता है तो याचिकाकर्ता 2024 के अधिनियम की धारा 17 के तहत अपील कर सकता है।

न्यायाधीश ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता की पत्नी को उचित मंच पर ‘तलाक-ए-हसन’ को चुनौती देने की स्वतंत्रता होगी। याचिकाकर्ता की पत्नी नोटिस दिए जाने के बावजूद अदालत में पेश नहीं हुई।

अदालत ने इन निर्देशों के साथ रिट याचिका का निपटारा कर दिया।

भाषा

सिम्मी मनीषा

मनीषा