गंगा जल संधि पर बांग्लादेश के साथ बिना और देरी किये बातचीत शुरू की जाए : संसदीय समिति
गंगा जल संधि पर बांग्लादेश के साथ बिना और देरी किये बातचीत शुरू की जाए : संसदीय समिति
नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) भारत और बांग्लादेश के बीच 1996 में हुई गंगा जल संधि की अवधि इस साल समाप्त होने का उल्लेख करते हुए संसद की एक समिति ने सरकार से ढाका के साथ ‘‘बिना किसी और देरी के’’ बातचीत शुरू करने का आग्रह किया है।
कांग्रेस नेता शशि थरूर की अध्यक्षता वाली विदेश मामलों की संसद की स्थायी समिति ने बृहस्पतिवार को संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में यह सिफारिश की।
‘‘भारत-बांग्लादेश संबंधों के भविष्य’’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में समिति ने कहा कि गंगा जल संधि 2026 में समाप्त होने वाली है और इसके नवीकरण को लेकर अभी तक द्विपक्षीय बातचीत शुरू नहीं हुई है।
समिति ने सुझाव दिया कि संधि के नवीकरण पर जल्द बातचीत शुरू की जानी चाहिए, जिसमें जल संबंधी नये आंकड़ों, जलवायु परिवर्तन के अनुमान और पश्चिम बंगाल तथा बिहार सरकार से परामर्श को शामिल किया जाना चाहिए।
वर्ष 1996 की गंगा जल संधि भारत और बांग्लादेश के बीच एक द्विपक्षीय समझौता है, जिसके तहत फरक्का बैराज पर गंगा नदी के पानी के बंटवारे की व्यवस्था 30 वर्षों के लिए की गई थी।
समिति ने बताया कि संधि की आंतरिक समीक्षा के लिए जुलाई 2023 में एक अंतर-मंत्रालयी समिति का गठन किया गया था और बांग्लादेश में गठित नयी सरकार के तहत दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बातचीत शुरू होने की उम्मीद है।
समिति ने कहा, ‘‘हालांकि ये कदम सही दिशा में हैं, लेकिन संधि के 2026 में समाप्त होने के साथ समय कम बचा है।’’
संसदीय समिति ने सरकार से आग्रह किया कि वह बांग्लादेश के साथ ‘‘बिना किसी और देरी के द्विपक्षीय बातचीत शुरू करे’’, ताकि 2026 के बाद किसी तरह की अनिश्चित स्थिति पैदा न हो।
समिति ने सिफारिश की कि अंतर-मंत्रालयी समिति द्वारा की जा रही आंतरिक समीक्षा को जल्द पूरा किया जाए, ताकि भारत की बातचीत के लिए रणनीति तैयार हो सके। उसने यह भी कहा कि पूरी प्रक्रिया के दौरान पश्चिम बंगाल और बिहार सरकार के साथ लगातार परामर्श जारी रखा जाना चाहिए।
समिति ने कहा कि उसे जानकारी दी गई है कि गंगा जल संधि तैयार करने में पश्चिम बंगाल की महत्वपूर्ण भागीदारी रही थी और राज्य के तत्कालीन वित्त मंत्री ने संधि के प्रावधान तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी।
समिति ने बताया कि पश्चिम बंगाल सरकार ने मार्च 2025 में कोलकाता में हुई संयुक्त नदी आयोग (जेआरसी) की हालिया बैठक में भी भाग लिया था।
समिति ने सिफारिश की कि संधि नवीकरण की प्रक्रिया में जल संबंधी नये आंकड़ों, जलवायु परिवर्तन के अनुमान और ‘‘नदियों के जल के न्यायसंगत एवं टिकाऊ उपयोग’’ की आवश्यकता को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
इसने बातचीत के दौरान तीस्ता नदी जल बंटवारे को लेकर पश्चिम बंगाल की चिंताओं को दूर करने के महत्व पर भी जोर दिया।
समिति ने कहा, ‘‘निष्पक्ष, समान और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समझौता प्राथमिकता बना हुआ है और पश्चिम बंगाल की चिंताओं का उचित समाधान किया जाना चाहिए।’’
इसने उम्मीद जताई कि दोनों देश इन वार्ताओं में ‘‘रचनात्मक दृष्टिकोण’’ अपनाएंगे और इन्हें ‘‘समयबद्ध तरीके से’’ पूरा करेंगे।
भाषा सुभाष सुरेश
सुरेश

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