तमिल गीतकार आर. वैरमुत्तु 60वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित
तमिल गीतकार आर. वैरमुत्तु 60वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित
नयी दिल्ली, 13 जुलाई (भाषा) प्रतिष्ठित तमिल गीतकार और वरिष्ठ लेखक आर. वैरमुत्तु को सोमवार को यहां 60वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाज़ा गया।
वैरमुत्तु को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कर्ण सिंह ने यहां आयोजित एक कार्यक्रम में 2025 के इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया। वह यह पुरस्कार पाने वाले तीसरे तमिल लेखक और पहले तमिल कवि बन गए हैं। संयोग से आज उनका 73वां जन्मदिन है।
आयोजकों के मुताबिक, उन्हें पुरस्कार स्वरूप 11 लाख रुपये का चेक, एक प्रशस्ति पत्र और ज्ञान की देवी वाग्देवी (सरस्वती) की एक कांस्य प्रतिमा प्रदान की गई।
उन्हें उपन्यास ‘कल्लिकट्टू इतिहासम’ के लिये 2003 में साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिला था। उन्हें 2003 में पद्मश्री और 2014 में पद्मभूषण पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। उन्हें सर्वश्रेष्ठ गीतकार के लिए सात बार राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है तथा तीन विश्वविद्यालयों ने उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि से नवाज़ा है।
वैरमुत्तु ने पुरस्कार ग्रहण करने के बाद कहा कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं है, बल्कि तमिल भाषा और समूचे भारतीय साहित्य का सम्मान है। उन्होंने अपने संघर्षपूर्ण जीवन और साहित्य साधना का उल्लेख करते हुए कहा कि साहित्य मानवता की आशा, संवेदना और नैतिक शक्ति का सबसे बड़ा आधार है तथा यह सम्मान उन्हें और अधिक सृजन के लिए प्रेरित करेगा।
वहीं, कर्ण सिंह ने कहा कि भारत एक ऐसा देश है, जो 20 से ज्यादा भाषाओं के जरिए अपनी भावनाओं को व्यक्त करता है।
उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसा कोई देश नहीं, जिसकी संस्कृति और साहित्य भारत जितना समृद्ध हो।
कांग्रेस नेता ने कहा कि आज विज्ञान और प्रौद्योगिकी के युग में भी साहित्य ही मनुष्य को संवेदनशील, सहिष्णु और मानवीय बनाए रखता है।
भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा वर्ष 1961 में स्थापित ज्ञानपीठ पुरस्कार लेखकों के आजीवन असाधारण योगदान को मान्यता देने वाला भारत के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मानों में से एक है।
भाषा नोमान दिलीप
दिलीप

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