तमिलनाडु: परंदूर हवाई अड्डा परियोजना रोकने के विरोध में द्रमुक ने विधानसभा से किया बहिर्गमन

तमिलनाडु: परंदूर हवाई अड्डा परियोजना रोकने के विरोध में द्रमुक ने विधानसभा से किया बहिर्गमन

तमिलनाडु: परंदूर हवाई अड्डा परियोजना रोकने के विरोध में द्रमुक ने विधानसभा से किया बहिर्गमन
Modified Date: August 24, 2026 / 03:59 pm IST
Published Date: August 24, 2026 3:59 pm IST

चेन्नई, 24 अगस्त (भाषा) तमिलनाडु के पास परंदूर में हवाई अड्डा परियोजना को रोकने के सरकार के फैसले के विरोध में सोमवार को विपक्षी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने विधानसभा से बहिर्गमन किया।

मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय द्वारा किसानों के हित में परंदूर में चेन्नई के दूसरे हवाई अड्डे की परियोजना को रोकने और जल्द ही किसी वैकल्पिक स्थान की पहचान करने की घोषणा के तुरंत बाद, द्रमुक सदस्य ई. वी. वेलू ने आपत्ति जताई।

उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष जे. सी. डी. प्रभाकर से इस विषय पर चर्चा की अनुमति देने का आग्रह किया।

हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष ने यह कहते हुए चर्चा की अनुमति देने से इनकार कर दिया कि जब मुख्यमंत्री या कोई मंत्री सदन में वक्तव्य देता है तो उस पर बहस की अनुमति नहीं दी जा सकती।

प्रभाकर ने कहा कि यदि सदस्य चाहें तो विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान इस मुद्दे को उठा सकते हैं।

विधानसभा अध्यक्ष ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा, ‘‘विधानसभा नियम 55 के तहत जब कोई मंत्री या मुख्यमंत्री वक्तव्य देते हैं, तो बहस या विस्तृत स्पष्टीकरण की अनुमति नहीं होती है।’’

नीतिगत बदलाव के सरकारी फैसले और इस मुद्दे पर चर्चा की अनुमति न मिलने के विरोध में द्रमुक सदस्यों ने विधानसभा से बहिर्गमन किया।

विधानसभा के बाहर पूर्व वित्त मंत्री टी. थेन्नरासु ने संवाददाताओं से कहा कि द्रमुक ने परियोजना की आवश्यकता पर चर्चा के लिए पहले ही एक ‘ध्यान आकर्षण प्रस्ताव’ प्रस्तुत किया था।

उन्होंने कहा कि चर्चा को अचानक रोककर विधानसभा अध्यक्ष ने उनके बोलने के लोकतांत्रिक अधिकार का हनन किया है।

उन्होंने दलील दी कि परंदूर हवाई अड्डा परियोजना चेन्नई और उसके आसपास के क्षेत्रों के औद्योगिक और आर्थिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण थी।

थेन्नरासु ने कहा कि अन्य क्षेत्रों को मौजूदा हवाई अड्डों या परमाणु प्रतिष्ठानों के कारण अनुपयुक्त पाया गया था, जबकि इस स्थान का चयन पर्यावरण और बुनियादी ढांचे के टकराव से बचने के लिए व्यापक तकनीकी अध्ययनों के बाद किया गया था।

भाषा खारी नरेश

नरेश


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