तमिलनाडु सरकार लोगों, पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली परियोजनाओं को मंजूरी नहीं देगी: मंत्री राजीव

तमिलनाडु सरकार लोगों, पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली परियोजनाओं को मंजूरी नहीं देगी: मंत्री राजीव

तमिलनाडु सरकार लोगों, पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली परियोजनाओं को मंजूरी नहीं देगी: मंत्री राजीव
Modified Date: August 18, 2026 / 03:09 pm IST
Published Date: August 18, 2026 3:09 pm IST

चेन्नई, 18 अगस्त (भाषा) तमिलनाडु के पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री वीके राजीव ने मंगलवार को राज्य विधानसभा में आश्वासन दिया कि मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार ऐसी किसी भी परियोजना को मंजूरी नहीं देगी, जिसका लोगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े या जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए।

राजीव ने तमिलनाडु में प्रस्तावित हाइड्रोकार्बन परियोजना को लेकर सदस्यों की चिंताओं को दूर करते हुए कहा कि राज्य में मछुआरों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली या पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी परियोजना को अनुमति नहीं दी जाएगी।

प्रस्तावित हाइड्रोकार्बन परियोजना को लेकर विधानसभा में लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब देते हुए मंत्री ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में हाइड्रोकार्बन कुओं की खुदाई की अनुमति द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) की पिछली सरकारों में दी गई थी।

उन्होंने कहा कि द्रमुक सरकार में तीन, जबकि अन्नाद्रमुक सरकार में एक हाइड्रोकार्बर कुएं की खुदाई की अनुमति दी गई थी।

राजीव ने बताया कि ‘हिंदुस्तान ऑयल एक्सप्लोरेशन कंपनी लिमिटेड’ ने मौजूदा समुद्री क्षेत्र में चार अतिरिक्त कुएं खोदने का प्रस्ताव दिया है।

उन्होंने बताया कि इस परियोजना को केंद्र सरकार से ‘विचारणीय शर्तें’ मिल चुकी हैं और साल की शुरुआत में आवेदन जमा किए जाने के बाद फिलहाल यह तमिलनाडु तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण के विचाराधीन है।

इससे पहले, सदस्यों ने परंगिपेट्टई के पास समुद्र में चार नये हाइड्रोकार्बन कुएं खोदने के ‘हिंदुस्तान ऑयल एक्सप्लोरेशन कंपनी लिमिटेड’ के प्रस्ताव पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि इस कदम से चिदंबरम विधानसभा क्षेत्र के पर्यावरण पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

सदस्यों के मुताबिक, ड्रिलिंग से समुद्री जीव-जंतुओं के अस्तित्व और स्थानीय मछुआरों की आजीविका के समक्ष गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि खारे पानी के कृषि भूमि में प्रवेश करने के जोखिम के कारण खेती की जमीन पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

भाषा तान्या पारुल

पारुल


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