तान्या नाथन केरल की पहली दृष्टिबाधित न्यायाधीश बनेंगी

तान्या नाथन केरल की पहली दृष्टिबाधित न्यायाधीश बनेंगी

तान्या नाथन केरल की पहली दृष्टिबाधित न्यायाधीश बनेंगी
Modified Date: February 9, 2026 / 09:13 pm IST
Published Date: February 9, 2026 9:13 pm IST

तिरुवनंतपुरम, नौ फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय द्वारा पिछले साल दिव्यांगों को न्यायिक सेवा में शामिल करने की अनुमति दिये जाने से 24 साल की तान्या नाथन को अपने सपनों को साकार करने का मौका मिला।

न्यायालय के फैसले से प्रेरित होकर, कन्नूर जिले के मंगड की रहने वाली दृष्टि बाधित तान्या ने विधि में स्नातक करने के बाद न्यायिक सेवा की परीक्षा में शामिल होने का फैसला किया और उनकी मेहनत रंग भी लाई। उन्होंने दीवानी न्यायाधीश (कनिष्ठ) की परीक्षा में दिव्यांग श्रेणी में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है और केरल की पहली दृष्टिबाधित न्यायाधीश बनकर इतिहास रचने वाली हैं।

नियुक्ति पत्र आने का इंतजार कर रही तान्या ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा कि वह इस पेशे की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे पता है कि यह एक चुनौतीपूर्ण पेशा होगा, लेकिन प्रौद्योगिकी इतनी आगे बढ़ गई है कि ज्यादातर न्यायिक काम ‘स्क्रीन रीडर’ और ‘डिक्टेशन सॉफ्टवेयर’ जैसे मददगार उपकरणों का इस्तेमाल करके किए जा सकते हैं।’’

जन्म से ही दृष्टिबाधित तान्या ने अपनी पढ़ाई धर्मडोम के दिव्यांग छात्रों के लिए विशेष तौर पर तैयार स्कूल से शुरू की। उन्होंने परासिनीकडावु उच्च माध्यमिक स्कूल से 10वीं तक और मोराझा राजकीय उच्चतर माध्यमिक स्कूल से 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की।

तान्या ने 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद विधि विषय में अध्ययन जारी रखने का फैसला किया।

उन्होंने बताया कि परिवार के सहयोग से वह प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करने में सफल हुई और कन्नूर विश्वविद्यालय में एलएलबी पाठ्यक्रम में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। वह संस्थान में दृष्टिबाधित एकमात्र छात्रा थीं।

तान्या ने बताया, ‘‘शिक्षकों को दृष्टिबाधित दिव्यांगों को पढ़ाने का अनुभव नहीं था, लेकिन उन्होंने मेरी जरूरतों को समझने और मेरा सहयोग करने का प्रयास किया, जिससे मुझे इस अंतर को दूर करने में मदद मिली।’’

तान्या ने वकील के रूप में पंजीकरण कराने के बाद कन्नूर के थालीपरम्बा में वकील के.जी. सुनीलकुमार के अधीन वकालत शुरू की।

उन्होंने बताया कि इसी दौरान वर्ष 2025 में उच्चतम न्यायालय की न्यायमूर्ति जे बी परदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने न्यायिक सेवा में दिव्यांगों को अवसर देने का फैसला सुनाया।

तान्या ने कहा, ‘‘उस फैसले ने मुझे परीक्षा की अधिसूचना जारी होने पर आवेदन करने के लिए प्रेरित किया।’’

तान्या के मुताबिक, उन्होंने ब्रेल लिपि का उपयोग करके नोट्स बनाकर परीक्षा की तैयारी स्वयं की थी।

भाषा धीरज सुरेश

सुरेश


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