प्रौद्योगिकी में देरी, तकनीक से वंचित होने के समान : वायुसेना प्रमुख

Ads

प्रौद्योगिकी में देरी, तकनीक से वंचित होने के समान : वायुसेना प्रमुख

  •  
  • Publish Date - July 30, 2026 / 06:35 PM IST,
    Updated On - July 30, 2026 / 06:35 PM IST

नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने बृहस्पतिवार को पायलट रहित हवाई प्रणाली और दूसरी जरूरी रक्षा प्रौद्योगिकी बनाने में ज्यादा आत्मनिर्भरता हासिल करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि “प्रौद्योगिकी में देरी का मतलब है तकनीक न मिलना” और ऐसी चीज का कोई फायदा नहीं है जो दूसरों के पास पहले से आ जाने के बाद मिले।

यहां एक कार्यक्रम में अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि “हमारे और नागरिक उड्डयन मंत्रालय तथा अन्य संबंधित मंत्रालयों के बीच बातचीत जारी है” ताकि “हम किसी ड्रोन की पहचान कर सकें कि वह असली ड्रोन है या कोई अवैध (दुश्मन/खतरनाक) ड्रोन”।

वायुसेना प्रमुख ने कहा, “हमें ऐसी स्थिति से बचना चाहिए जहां हम अपने ही ड्रोन को मार गिराएं या ऐसी किसी चीज को नष्ट कर दें जो हमारे ही इस्तेमाल के लिए हो।” यहां भारतीय रक्षा विनिर्माता सोसाइटी (एसआईडीएम) की ओर से आयोजित एक कार्यशाला में वायुसेना प्रमुख ने मानव संचालित विमानों और ड्रोन समेत अन्य मानवरहित हवाई प्रणालियों (यूएएस) के एकीकरण पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि ये सभी प्रणालियां एक ही हवाई क्षेत्र में संचालित होंगी।

कार्यशाला में रक्षा क्षेत्र के सैन्य और उद्योग जगत के कई विशेषज्ञ शामिल हुए।

उन्होंने कहा, “एकीकरण बहुत जरूरी है। हमारे पास ऐसे मानव-संचालित विमान और लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल हैं जो उसी वायुक्षेत्र का इस्तेमाल करेंगे जहां ड्रोन भी आएंगे। मैं कई तरह के ड्रोन की बात कर रहा हूं – छोटे माइक्रो या मिनी ड्रोन से लेकर यूएएस तक, जो एक पूरे एयरक्राफ्ट की तरह होते हैं, बस उनमें कोई इंसान नहीं होता।”

उन्होंने कहा, “…अगर कुछ ऐसे कलपुर्जे हैं जिनके लिए हम अभी किसी दूसरे देश पर निर्भर हैं, तो जाहिर है कि हम उस देश के चंगुल में फंस सकते हैं, क्योंकि वह उन चीजों की आपूर्ति रोक सकता है।”

अपने संबोधन में हालांकि, वायुसेना प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया कि प्रौद्योगिकी का विकास तेजी से होना चाहिए, क्योंकि नई और क्रांतिकारी प्रौद्योगिकी के आने से चीजें तेजी से बदल रही हैं और हर दिन कुछ नया सामने आ रहा है।

उन्होंने कहा, “तो जाहिर है, यह चिंता कि कहीं हम पीछे न छूट जाए या हम पीछे न रह जाएं, एक ऐसी चीज है जो हमें हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित करती रहनी चाहिए। मैं फिर से अपनी कुछ पसंदीदा बातें दोहरा रहा हूं: अगर प्रौद्योगिकी में देरी होती है, तो समझिए कि वह तकनीक मिली ही नहीं। ऐसी चीज का कोई फायदा नहीं जो तब मिले जब दूसरे लोग उसे पाकर उससे आगे बढ़ चुके हों। इसलिए, हमें यह पक्का करने के लिए खुद को प्रेरित करना होगा कि ये चीजें समय पर हों।”

उन्होंने कहा, “और बात सिर्फ प्रौद्योगिकी की नहीं है, जो बस प्रयोगशाला तक ही सीमित रहे। अगर हमारे पास प्रौद्योगिकी है, लेकिन वह प्रयोगशाला से बाहर नहीं आई है, तो भी उसका कोई फायदा नहीं है।”

भाषा प्रशांत नरेश

नरेश