तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष ने बीआरएस के दो विधायकों को अयोग्य ठहराने संबंधी याचिका खारिज की

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तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष ने बीआरएस के दो विधायकों को अयोग्य ठहराने संबंधी याचिका खारिज की

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  • Publish Date - March 11, 2026 / 03:39 PM IST,
    Updated On - March 11, 2026 / 03:39 PM IST

हैदराबाद, 11 मार्च (भाषा) तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष गद्दम प्रसाद कुमार ने भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें दो विधायकों दानम नागेंद्र और कादियम श्रीहरि को अयोग्य ठहराने की मांग की गई थी। इसके साथ ही बीआरएस के 10 विधायकों के दल-बदल संबंधी मामले का अंत हो गया।

अध्यक्ष ने नागेंद्र और श्रीहरि के खिलाफ दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया। विपक्षी दल बीआरएस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अध्यक्ष के इस फैसले पर आपत्ति जताई और कहा कि नागेंद्र ने तो 2024 का लोकसभा चुनाव भी कांग्रेस के टिकट पर लड़ा था।

प्रसाद कुमार ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि दोनों विधायकों को अयोग्य घोषित करने संबंधी याचिकाएं खारिज कर दी गई हैं।

बीआरएस ने नागेंद्र, श्रीहरि और आठ अन्य विधायकों के खिलाफ याचिकाएं दायर करते हुए आरोप लगाया था कि उन्होंने 2023 में बीआरएस के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद सत्तारूढ़ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का दामन थाम लिया।

बीआरएस के अलावा भाजपा विधायक ए. महेश्वर रेड्डी ने भी नागेंद्र को अयोग्य ठहराने के लिए याचिका दायर की थी।

विधानसभा अध्यक्ष इससे पहले बीआरएस के आठ विधायकों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाएं भी खारिज कर चुके हैं।

खैरताबाद से विधायक नागेंद्र और स्टेशन घनपुर से विधायक श्रीहरि के खिलाफ अयोग्यता याचिकाएं भी खारिज होने के साथ ही अध्यक्ष के समक्ष बीआरएस के 10 विधायकों के खिलाफ दायर सभी अयोग्यता याचिकाओं का निपटारा हो गया है और इस विवाद का अंत हो चुका है।

इसपर प्रतिक्रिया देते हुए बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामाराव ने कहा कि दोनों विधायकों को ‘क्लीन चिट’ देना लोकतंत्र पर “हमला” है।

उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘दल-बदल को प्रोत्साहित करने वाला अध्यक्ष का यह फैसला लोकतंत्र के इतिहास में एक काला दिन है।’’

उन्होंने यह भी बताया कि नागेंद्र ने 2024 का लोकसभा चुनाव भी कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में लड़ा था और कहा कि ऐसे व्यक्ति को ‘क्लीन चिट’ देना जनता के जनादेश का अपमान है।

कांग्रेस शासित तेलंगाना में विधानसभा अध्यक्ष के इस फैसले को संविधान का खुला मज़ाक बताते हुए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने कहा कि यह फैसला इस बात का बड़ा उदाहरण है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी जिस “संविधान के सम्मान” की बात अक्सर करते हैं, उसका असली रूप क्या है।

हालांकि, नागेंद्र ने पत्रकारों से कहा कि लोकसभा चुनाव लड़ना एक नागरिक के रूप में उनका मौलिक अधिकार है।

उन्होंने दावा किया कि उन्होंने बीआरएस की सदस्यता नहीं छोड़ी और कांग्रेस की सदस्यता भी नहीं ली।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने (मैंने और अन्य नौ बीआरएस विधायकों ने) विधानसभा में बीआरएस के खिलाफ कोई काम नहीं किया था।”

श्रीहरि ने कहा कि उनके विचार में विधायकों के खिलाफ दायर की गई अयोग्यता याचिकाएं अवैध थीं।

उन्होंने सवाल किया कि ये अयोग्यता याचिकाएं बीआरएस विधायकों द्वारा क्यों दायर की गईं, पार्टी की ओर से क्यों नहीं?

श्रीहरि ने याद दिलाया कि जब बीआरएस सत्ता में थी तब उसने भी अन्य दलों के विधायकों को पार्टी में शामिल किया था। उन्होंने कहा कि यदि बीआरएस अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव दूसरे दलों के विधायकों को अपनी पार्टी में शामिल करने के लिए लोगों से माफी मांग लें तो वह इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं।

भाषा सुरेश नरेश

नरेश