ठाणे, सात मई (भाषा) ठाणे जिले के उल्हासनगर इलाके में स्थित सेंट्रल अस्पताल में इलाज के दौरान एक व्यक्ति की मौत के बाद उसके परिजनों ने बृहस्पतिवार तड़के अस्पताल में तोड़फोड़ की।
इस घटना के विरोध में अस्पताल के चिकित्सकों और कर्मचारियों ने कुछ देर हड़ताल की, हालांकि महापौर के आश्वासन के बाद उन्होंने आंदोलन समाप्त कर दिया।
एक स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि यह घटना भगवान निम्बोरे की मौत के कुछ ही समय बाद हुई। व्यक्ति को बुधवार रात को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. मनोहर बंसोडे ने कहा, “मरीज का मस्तिष्क, यकृत और गुर्दे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे और अस्पताल लाए जाने के दौरान उनकी हालत गंभीर थी। हमने अंत तक उनका इलाज जारी रखा और उनकी स्थिति के बारे में महापौर को भी लगातार जानकारी देते रहे। हम मरीज को किसी अन्य अस्पताल में भेज सकते थे, लेकिन उनकी हालत इतनी गंभीर थी कि रास्ते में ही उनकी मृत्यु हो जाती।”
उन्होंने कहा, ‘उनकी मृत्यु के बाद, अस्पताल में मौजूद लगभग 15 से 20 रिश्तेदार और अन्य लोग आक्रामक हो गए और उन्होंने एक चिकित्सक और एक नर्स पर हमला किया। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची पर इसके बावजूद उग्र भीड़ ने शीशे तोड़ दिए, काउंटर, कुर्सियां और निगरानी उपकरण क्षतिग्रस्त कर दिए। घटना के बाद, अस्पताल के चिकित्सकों और कर्मचारियों ने सख्त कार्रवाई और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था की मांग करते हुए काम बंद कर दिया।’
उल्हासनगर की महापौर अश्विनी निकम और नगर निगम के अधिकारी तुरंत अस्पताल पहुंचे और प्रदर्शनकारी कर्मचारियों को आश्वासन दिया कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, जिसके बाद उन्होंने आंदोलन वापस ले लिया।
निकम ने कहा कि यह घटना बेहद निंदनीय है और पुलिस को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को ज्ञापन सौंपकर सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है, जिसमें कम से कम एक सशस्त्र कर्मी की तैनाती भी शामिल है।
केंद्रीय पुलिस थाने के एक अधिकारी ने बताया कि भीड़ के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के तहत मामला दर्ज किया गया है, हालांकि अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।
भाषा तान्या पवनेश
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