टीबी यानी क्षयरोग, ये बीमारी आम तौर पर लोगों को कैंसर, एड्स की तरह भयावह नहीं लगती, लेकिन आप ये जानकर हैरान रह जाएंगे कि दुनिया में सबसे ज्यादा मौत इसी बीमारी से होती है।
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वर्ल्ड टीबी डे यानी विश्व क्षय दिवस पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपने ट्विटर हैंडल पर ये संदेश पोस्ट किया है, उसपर दर्ज आंकड़ों पर एक नज़र डालते ही आपको टीबी की भयानकता का अहसास हो जाएगा। औसतन 28500 लोग रोजाना टीबी के शिकार हो रहे हैं यानी इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं और औसतन 4700 टीबी मरीज रोजाना दम तोड़ देते हैं।
Today is #WorldTBDay
Despite being curable, tuberculosis is the world’s leading infectious killer.
We need more leaders for a TB-free world!
To #EndTB, we need YOU.https://t.co/xpCBvndG8S pic.twitter.com/lYElGAluQD— WHO (@WHO) March 23, 2018
भारत में तो इस बीमारी की स्थिति दुनिया में सबसे ज्यादा गंभीर है। टीबी का हर चौथा मरीज भारत में है यानी दुनिया के कुल टीबी पेशेंट्स का 27 फीसदी भारत में है। शहरों से लेकर गांवों तक स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी की मुफ्त दवाएं, इलाज उपलब्ध हैं, ऐसा दावा हमेशा किया जाता रहा है, लेकिन दूसरी ओर टीबी मरीजों की संख्या साल दर साल न सिर्फ बढ़ रही है, बल्कि डेढ़गुनी रफ्तार से बढ़ी है। 2014 में टीबी के नए मामले 22 लाख थे जो 2015 में 28 लाख हो गए, ये रिपोर्ट विश्व स्वास्थ्य संगठन की है।
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हाल के वर्षों में दवा प्रतिरोधी टीबी एक बहुत बड़ी समस्या बनकर सामने आई है, ये वो टीबी है, जिसमें इस बीमारी के जीवाणुओं पर उपलब्ध दवाओं का असर नहीं होता। इस तरह की टीबी से निपटना अगर दुनिया भर के देशों के लिए चुनौती है तो भारत के लिए तो असंभव जैसी चुनौती है। दवा प्रतिरोधी टीबी एंटीबायोटिक दवाओं के गलत इस्तेमाल और टीबी के इलाज के दौरान बीच में ही दवा छोड़ देने के कारण होती है।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने टीबी के खात्मे के लिए 2030 तक का लक्ष्य रखा है, लेकिन भारत के लिए ये लक्ष्य 2025 तक निर्धारित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि इस बीमारी को जड़ से मिटाने के लिए सरकार युद्धस्तर पर काम कर रही है।
Government of India is working in mission mode to make India TB-free. While the world has set a target of 2030 for TB elimination, we in India want to become TB-free by 2025!
At the recent Delhi End TB Summit, I spoke more about the subject. https://t.co/mbAbsZ5wMk #WorldTBDay
— Narendra Modi (@narendramodi) March 24, 2018
24 मार्च 1882 को रॉबर्ट कोच ने टीबी के जीवाणु की खोज की थी, इस खोज के आधार पर इस बीमारी से निपटने की दवा बनाने में मदद मिली। यही कारण है कि 24 मार्च को विश्व भर में जागरुकता लाने के लिए वर्ल्ड टीबी डे मनाया जाता है।
वेब डेस्क, IBC24