न्यायालय ने सेंगर के खिलाफ सीबीआई की याचिका में पीड़िता को पक्षकार बनने की अनुमति दी

Ads

न्यायालय ने सेंगर के खिलाफ सीबीआई की याचिका में पीड़िता को पक्षकार बनने की अनुमति दी

  •  
  • Publish Date - March 9, 2026 / 06:34 PM IST,
    Updated On - March 9, 2026 / 06:34 PM IST

नयी दिल्ली, नौ मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता को पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की आजीवन कारावास की सजा के निलंबन को चुनौती देने संबंधी सीबीआई की याचिका में पक्षकार बनने की सोमवार को अनुमति दे दी।

शीर्ष अदालत ने कहा कि पीड़िता को कार्यवाही में अपना पक्ष रखने का अधिकार है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने पीड़िता को मामले में पक्षकार बनाए जाने की अनुमति देते हुए कहा कि पीड़ितों को अपने हितों को प्रभावित करने वाली कार्यवाही में भाग लेने का अधिकार है, जो लखीमपुर खीरी मामले में शीर्ष अदालत के पूर्व के फैसले के अनुरूप है।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हमारा मानना ​​है कि पीड़िता को अपना पक्ष रखने का अधिकार है’’ और उन्होंने दोषी की आजीवन कारावास की सजा के निलंबन के खिलाफ हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया।

हालांकि, पीठ ने दुष्कर्म पीड़िता के एक रिश्तेदार द्वारा दायर हस्तक्षेप अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें उसके जीवन और स्वतंत्रता को खतरे का दावा किया गया था।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि वह सीबीआई की याचिका में हस्तक्षेप करने के बजाय स्वतंत्र उपाय का सहारा ले सकते हैं और सुरक्षा के लिए उच्च न्यायालय में अपील कर सकते हैं। इसके बाद पीठ ने उनकी याचिका खारिज कर दी।

पीठ ने सजा निलंबन के खिलाफ दायर सीबीआई की याचिका पर सुनवाई नहीं की, क्योंकि जांच एजेंसी की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सोमवार को उपलब्ध नहीं थे।

सेंगर का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने मामले की सुनवाई जल्द से जल्द कराने का अनुरोध किया। इस पर, प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि सुनवाई की तारीख जल्द ही तय की जाएगी।

पिछले साल 29 दिसंबर को, शीर्ष अदालत ने 2017 के उन्नाव दुष्कर्म मामले में सेंगर की आजीवन कारावास की सजा को निलंबित करने संबंधी दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी थी और कहा था कि उन्हें रिहा नहीं किया जाएगा।

उन्नाव दुष्कर्म मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे सेंगर की जेल की सजा को उच्च न्यायालय ने उसकी अपील पर सुनवाई लंबित रहने तक निलंबित कर दिया था।

सेंगर ने मामले में दिसंबर 2019 के अधीनस्थ अदालत के फैसले को चुनौती दी थी। हालांकि, वह तब से जेल में ही है, क्योंकि वह पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में भी 10 साल की कैद की सजा काट रहा है और उस मामले में उसे जमानत नहीं मिली है।

भाषा सुभाष नेत्रपाल दिलीप

दिलीप