नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ का एक अदालत में जमा पासपोर्ट वापस करने के अनुरोध संबंधी उनकी अर्जी सोमवार को तीन न्यायाधीशों की पीठ के पास भेज दी।
सीतलवाड़ ने 2002 के गोधरा कांड के बाद हुए दंगों के मामले में बेकसूर लोगों को फंसाने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने के मामले में जमानत की एक शर्त के तौर पर अदालत में अपना पासपोर्ट जमा किया था।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि मामले को प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत के समक्ष रखा जाए, और कहा कि जमानत तीन न्यायाधीशों की पीठ द्वारा दी गई थी।
सीतलवाड़ की ओर से शीर्ष अदालत में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि जमानत के लिए लगाई गई शर्तों में से एक शर्त यह थी कि उनका पासपोर्ट सत्र न्यायालय में जमा रहेगा।
उच्चतम नयायालय ने 19 जुलाई 2023 को सीतलवाड़ को राहत देते हुए, मामले में उन्हें नियमित जमानत दे दी थी, जबकि गुजरात उच्च न्यायालय के उन्हें जमानत देने से इनकार करने के आदेश को ‘‘अतर्कसंगत’’ और ‘‘विरोधाभासी’’ करार दिया था।
उच्च न्यायालय के 1 जुलाई 2023 के आदेश को रद्द करते हुए, तीन न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि सीतलवाड़ से हिरासत में पूछताछ आवश्यक नहीं है, क्योंकि मामले में आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है और अधिकांश साक्ष्य दस्तावेजी प्रकृति के हैं।
उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि सीतलवाड़ का पासपोर्ट, जिसे वह पहले ही सौंप चुकी हैं, सत्र न्यायालय में जमा रहेगा और वह गवाहों को प्रभावित करने का कोई प्रयास न करें।
अदालत ने उल्लेख किया कि सीतलवाड़ के खिलाफ प्राथमिकी 24 जून 2022 को उच्चतम न्यायालय के उस फैसले के बाद दर्ज की गई थी, जो जकिया जाफरी के मामले में आया था।
जाफरी ने गुजरात में 2002 के साम्प्रदायिक दंगों के पीछे एक बड़ी साजिश का आरोप लगाया था और उच्च न्यायालय के 5 अक्टूबर 2017 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें शीर्ष अदालत द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल (एसआईटी) के निष्कर्षों के खिलाफ उनकी याचिका को खारिज कर दिया गया था।
जकिया जाफरी पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी की पत्नी हैं, जो साम्प्रदायिक दंगों के दौरान गुलबर्ग हाउसिंग सोसाइटी में मारे गए लोगों में शामिल हैं।
भाषा सुभाष दिलीप
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