Monsoon 2026 Forecast News : क्या इस साल पड़ेगा सूखा? मौसम विभाग की डराने वाली भविष्यवाणी, सिर्फ 92% बारिश से किसानों की बढ़ी टेंशन

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IMD के अनुसार साल 2026 में देश में मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है और केवल 92% बारिश होने का अनुमान है। अल नीनो के प्रभाव के कारण कम वर्षा से किसानों, फसलों और महंगाई पर सीधा असर पड़ सकता है।

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  • Publish Date - April 13, 2026 / 10:36 PM IST,
    Updated On - April 13, 2026 / 10:39 PM IST

Monsoon 2026 Forecast News / Image Source : FILE

HIGHLIGHTS
  • IMD ने 2026 मानसून को सामान्य से कमजोर बताया
  • देश में केवल 92% बारिश का अनुमान
  • अल नीनो की वजह से बढ़ सकता है सूखे का खतरा

नई दिल्ली : Monsoon 2026 Forecast News भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने साल 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून को लेकर एक चिंताजनक पूर्वानुमान जारी किया है। इस साल देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून की स्थिति सामान्य से कमजोर रहने की संभावना है। जून से सितंबर के दौरान होने वाली बारिश का स्तर इस बार औसत से नीचे रहने का अनुमान है, जिससे कृषि क्षेत्र और जल प्रबंधन को लेकर चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

92% ही रहेगी बारिश

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस साल देशभर में बारिश अपने औसत का केवल 92% ही रहेगी। जब बारिश 96% से कम होती है, तो उसे सामान्य से कम माना जाता है। Low Rainfall India इस कमी की सबसे बड़ी वजह अल नीनो को बताया जा रहा है। अल नीनो समुद्र में होने वाली एक हलचल है, जिससे मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं और बारिश कम होती है। अगर यह ज्यादा प्रभावी रहा, तो देश के कई राज्यों में सूखे जैसे हालात भी बन सकते हैं।

कम बारिश का सीधा असर सीधे किसानों पर

कुल मिलाकर, 2026 का मानसून किसानों के लिए थोड़ा मुश्किल भरा साबित हो सकता है। कम बारिश का सीधा असर फसलों की पैदावार और आने वाले समय में महंगाई पर पड़ सकता है। मौसम विभाग ने सलाह दी है कि अभी से पानी का सही इस्तेमाल और खेती की वैकल्पिक योजनाएं बनाना शुरू कर देना चाहिए। विभाग जल्द ही इस पर और अधिक जानकारी साझा करेगा।

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अल नीनो क्या होता है?

अल नीनो समुद्र में तापमान बढ़ने की एक प्रक्रिया है, जिससे मानसूनी हवाएं कमजोर हो जाती हैं और बारिश कम होती है।

92% बारिश का क्या मतलब है?

इसका मतलब है कि सामान्य औसत से कम बारिश होगी, जिससे सूखे जैसे हालात बन सकते हैं।

कम बारिश का सबसे ज्यादा असर किस पर पड़ेगा?

इसका सबसे ज्यादा असर किसानों, फसल उत्पादन और खाद्य कीमतों (महंगाई) पर पड़ेगा।