अदालत ने सरकारी अस्पतालों में नैदानिक, रेडियोलॉजी संबंधी सुविधाओं पर जानकारी मांगी

अदालत ने सरकारी अस्पतालों में नैदानिक, रेडियोलॉजी संबंधी सुविधाओं पर जानकारी मांगी

अदालत ने सरकारी अस्पतालों में नैदानिक, रेडियोलॉजी संबंधी सुविधाओं पर जानकारी मांगी
Modified Date: January 13, 2026 / 09:00 pm IST
Published Date: January 13, 2026 9:00 pm IST

नयी दिल्ली, 13 जनवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार से राष्ट्रीय राजधानी के सभी सरकारी अस्पतालों की सूची और वहां उपलब्ध ‘वास्तविक’ जांच और एक्स-रे, एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी रेडियोलॉजी संबंधी सुविधाओं की जानकारी प्रस्तुत करने को कहा है।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मनमीत पी.एस. अरोड़ा की पीठ ने सरकार से यह खुलासा करने को कहा कि क्या इन अस्पतालों में नैदानिक मशीन चालू हालत में हैं और 2025 में वहां कितने मरीजों की जांच की गई।

दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में कथित तौर पर गहन चिकित्सा सुविधाओं की कमी को लेकर 2017 में स्वतः संज्ञान लिए गए एक मामले की सुनवाई करते हुए, पीठ ने इस शिकायत पर भी गौर किया कि रेडियोलॉजी परीक्षणों की रिपोर्ट “काफी विलंबित” होती हैं। अदालत ने दिल्ली सरकार को इस पहलू पर गौर करने और एक रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा।

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अदालत ने आठ जनवरी को पारित अपने आदेश में कहा, ‘‘दिल्ली सरकार द्वारा एक तालिका तैयार किया जाए और उसे रिकॉर्ड में रखा जाए। इसमें दिल्ली के सभी सरकारी अस्पतालों की सूची और उनमें उपलब्ध वास्तविक नैदानिक ​​और एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और एमआरआई समेत रेडियोलॉजी संबंधी सेवाओं के विवरण दिए जाएं।”

पीठ ने कहा, ‘‘सरकारी अस्पतालों की सूची में इस बात का विवरण भी शामिल होगा कि इन अस्पतालों में मशीन चालू हैं या नहीं और पिछले साल कितने मरीजों की जांच की गई।’’

दिल्ली सरकार के वकील ने अदालत को सूचित किया कि यदि सरकारी अस्पतालों में एमआरआई, सीटी स्कैन और अन्य रेडियोलॉजिकल सेवाओं के लिए प्रतीक्षा अवधि तीन दिन से अधिक होती है, तो 35 सूचीबद्ध निदान केंद्र हैं जहां मरीजों को मुफ्त सेवाएं मिल सकती हैं।

वकील ने बताया कि इन 35 केंद्रों में से कुछ में रेडियोलॉजी संबंधी सेवाएं उपलब्ध हैं, और पिछले वर्ष इन केंद्रों को 80 करोड़ रुपये की राशि वितरित की गई थी।

हालांकि, अदालत ने कहा कि वह सरकार के रुख से ‘संतुष्ट नहीं’ है क्योंकि इस बात पर कोई स्पष्टता नहीं है कि क्या ये 35 नैदानिक केंद्र अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे, एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी रेडियोलॉजी संबंधी सेवाएं प्रदान करने में सक्षम हैं, जो रोगियों के लिए ‘बहुत ही बुनियादी आवश्यक सेवाएं’ हैं।

अदालत ने दिल्ली सरकार से सभी 35 नैदानिक केंद्रों और वहां उपलब्ध सेवाओं के बारे में विस्तृत जानकारी देने के लिए कहा। इसके साथ ही सरकारी अस्पतालों से भेजे जाने के बाद रेडियोलॉजी संबंधी सेवाओं का लाभ उठाने वाले रोगियों की संख्या भी बताने को कहा गया।

पीठ ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) और दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (डीएसएसएसबी) को सरकारी अस्पतालों में कई गैर-शिक्षण कर्मचारियों, शिक्षण कर्मचारियों, विशेषज्ञों और चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती में तेजी लाने के लिए निर्देश भी दिए।

इस मामले की अगली सुनवाई 13 फरवरी को होगी।

भाषा आशीष प्रशांत

प्रशांत


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