मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित करने पर जिलाधिकारी को उच्च नयायायल ने फटकार लगायी

Ads

मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित करने पर जिलाधिकारी को उच्च नयायायल ने फटकार लगायी

  •  
  • Publish Date - March 14, 2026 / 02:58 PM IST,
    Updated On - March 14, 2026 / 02:58 PM IST

प्रयागराज, 14 मार्च (भाषा) मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित करने के सवाल पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि यदि पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी को लगता है कि नमाजियों की संख्या अधिक होने से कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है इसलिए वे उनकी संख्या सीमित करना चाहते हैं तो उन्हें या तो इस्तीफा दे देना चाहिए या संभल जिले से स्थानांतरण करा लेना चाहिए क्योंकि वे कानून का राज स्थापित करने में पर्याप्त रूप से सक्षम नहीं हैं।

न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की पीठ ने कहा, “यह सुनिश्चित करना सरकार का दायित्व है कि प्रत्येक समुदाय निर्धारित उपासना स्थल पर शांतिपूर्वक उपासना कर पाये और यदि वह निजी संपत्ति हो तो उपासना के लिए सरकार से कोई अनुमति लेनी आवश्यक नहीं है।”

उच्च न्यायालय ने 27 फरवरी को अपने निर्णय में कहा, “यह अदालत पहले से व्यवस्था दे चुकी है कि यदि धार्मिक कार्यक्रम सार्वजनिक भूमि या स्थान पर किया जाता है जिसमें सरकारी तंत्र को शामिल करना आवश्यक है तो इसके लिए सरकार से अनुमति लेनी आवश्यक है।”

उच्च न्यायालय ने संभल के मुनाजिर खान नामक एक व्यक्ति की याचिका पर यह आदेश दिया। खान ने आरोप लगाया है कि गाटा संख्या 291 पर जहां एक मस्जिद मौजूद है, रमजान के दौरान उसे नमाज अदा करने से रोका गया।

दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश सरकार के वकील ने गाटा संख्या 291 के स्वामित्व पर यह कहते हुए विवाद खड़ा किया कि उक्त गाटा राजस्व रिकॉर्ड में सुखी सिंह के बेटों- मोहन सिंह और भूराज सिंह के नाम है लेकिन वहां 20 नमाजियों को नमाज अदा करने की अनुमति दी गई।

याचिकाकर्ता ने कहा कि रमजान का महीना होने के चलते बड़ी संख्या में नमाजी वहां नमाज अदा करने आ सकते थे।

इस पर राज्य सरकार के वकील ने कहा कि कानून व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए नमाजियों की संख्या सीमित करने का आदेश जारी किया गया।

अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई की तिथि 16 मार्च तय की।

भाषा सं राजेंद्र राजकुमार

राजकुमार