वामदल ज्ञानेश कुमार को सीईसी पद से हटाने की मांग करते हुए दो अक्टूबर को कोलकाता में रैली निकालेंगे

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वामदल ज्ञानेश कुमार को सीईसी पद से हटाने की मांग करते हुए दो अक्टूबर को कोलकाता में रैली निकालेंगे

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  • Publish Date - September 30, 2026 / 04:39 PM IST,
    Updated On - September 30, 2026 / 04:39 PM IST

कोलकाता, 30सितंबर (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की पश्चिम बंगाल इकाई के सचिव मोहम्मद सलीम ने बुधवार को कहा कि वामदल ज्ञानेश कुमार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) के पद से हटाने और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग करते हुए दो अक्टूबर को यहां एक विरोध रैली निकालेंगे।

उन्होंने मंगलवार को नयी दिल्ली में निर्वाचन आयोग के मुख्यालय के बाहर माकपा महासचिव एम ए बेबी और अन्य वाम नेताओं को हिरासत में लिए जाने की निंदा की। ये नेता मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर चल रहे विवाद के बीच कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर वहां विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे।

सलीम ने एक बयान में कहा, ‘‘ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से हटाने तथा एसआईआर प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग करते हुए दो अक्टूबर को यहां एस्प्लेनेड इलाके में नेताजी की मूर्ति से महात्मा गांधी की मूर्ति तक एक जुलूस निकाला जाएगा। ’’

उन्होंने कहा कि रैली में एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए सभी नामों को फिर से शामिल करने की मांग भी की जाएगी।

उन्होंने कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि निर्वाचन आयोग के कामकाज के लोकतांत्रिक और स्वतंत्र नियम फिर से बहाल हों।’’

माकपा नेता ने आरोप लगाया कि सीईसी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राजनीतिक मकसद पूरे करने के लिए मतदाता सूची से लाखों नाम हटवाए हैं।

वामदल सीईसी को हटाने, एसआईआर प्रक्रिया को तत्काल रोकने, इस प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर हटाये गये असली मतदाताओं के नाम वापस जोड़ने और सीईसी एवं अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को रद्द करने की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।

पश्चिम बंगाल में अप्रैल में हुए विधानसभा चुनाव में माकपा ने सिर्फ एक सीट जीती, जबकि बाकी वामपंथी पार्टियां कोई भी सीट नहीं जीत सकीं।

विधानसभा चुनावों से पहले राज्य में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण किया गया था।

सीईसी और निर्वाचन आयोग को हाल में ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खबर के बाद आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। इस खबर में दावा किया गया था कि निर्वाचन आयुक्तों–सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने उन फैसलों एवं आदेशों पर आपत्ति जताई थी, जो उनके अनुसार उनकी जानकारी के बिना जारी किए गए थे।

खबर के मुताबिक, उनकी आपत्तियां कानूनी मतदाता पंजीकरण फार्म छह में किए गए बदलाव, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया, और ‘मतदाता सूची डेटाबेस’ पर केंद्रीकृत नियंत्रण से जुड़ी थीं।

भाषा राजकुमार माधव

माधव