याचिका में चमड़ा उद्योग को गलत तरीके से ‘श्वेत’ श्रेणी में रखे जाने का दावा; एनजीटी ने जवाब मांगा

याचिका में चमड़ा उद्योग को गलत तरीके से ‘श्वेत’ श्रेणी में रखे जाने का दावा; एनजीटी ने जवाब मांगा

याचिका में चमड़ा उद्योग को गलत तरीके से ‘श्वेत’ श्रेणी में रखे जाने का दावा; एनजीटी ने जवाब मांगा
Modified Date: November 29, 2022 / 08:31 pm IST
Published Date: October 9, 2020 11:03 am IST

नयी दिल्ली, नौ अक्अूबर (भाषा)राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) को उस याचिका पर जवाब देने का कहा है, जिसमें दावा किया गया है कि चमड़ा उद्योग को राज्य में गलत तरीके से ‘श्वेत’ उद्योग श्रेणी में रखा गया है।

गौरतलब है कि उद्योगों को चार श्रेणियों में बांटा गया है–लाल, नारंगी, हरा और सफेद(श्वेत)। श्वेत श्रेणी में वे उद्योग शामिल हैं, जिनसे प्रदूषण नहीं होता है, जैसे कि जैव उर्वरक, मेडिकल ऑक्सीजन, सूती और ऊनी पोशाक उद्योग, जैविक खाद आदि।

एनजीटी अध्यक्ष आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने सीपीसीबी और यूपीपीसीबी को 28 जनवरी 2021 से पहले अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

पीठ में न्यामूर्ति पी वांगदी और विशेषज्ञ सदस्य एन नंदा भी शामिल हैं।

पीठ ने कहा, ‘‘सीपीसीबी और यूपीपीसीबी सुनवाई की अगली तारीख से पहले अपना जवाब दाखिल करें। इस बीच, यूपीपीसीबी कोई मंजूरी प्रदान नहीं करे…। ’’

एनजीटी उप्र निवासी शरद गुप्ता की एक याचिका पर सुनवाई कर रहा है। याचिका यूपीपीसीबी के नौ जनवरी 2019 के आदेश के खिलाफ दायर की गई है। आदेश में हरित श्रेणी और श्वेत श्रेणी के उद्योगों की सूची जारी की गई थी।

याचिका में दावा किया गया है कि चमड़ा उद्योग को गलत तरीके से ‘श्वेत श्रेणी’ में रखा गया है।

याचिकाकर्ता ने इस बात का जिक्र किया कि सूची सीपीसीबी के आदेश का विरोधाभासी है और यूपीपीसीबी वर्गीकरण के लिये नियमों में और छूट नहीं दे सकता, हालांकि वह इसे और कठोर जरूर बना सकता है।

भाषा

सुभाष माधव

माधव


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