मुक्त संवाद का दायरा सिकुड़ रहा है; राजनीति और धर्म ने हमें निराश किया : कैलाश सत्यार्थी

मुक्त संवाद का दायरा सिकुड़ रहा है; राजनीति और धर्म ने हमें निराश किया : कैलाश सत्यार्थी

  •  
  • Publish Date - January 15, 2026 / 07:00 PM IST,
    Updated On - January 15, 2026 / 07:00 PM IST

नयी दिल्ली, 16 जनवरी (भाषा) नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित और प्रमुख समाज सुधारक कैलाश सत्यार्थी का कहना है कि वर्तमान दौर में मानवता और पृथ्वी गंभीर खतरे में है, मुक्त संवाद का दायरा सिकुड़ रहा है और राजनीति एवं धर्म ने समाज को निराश किया है।

बाल अधिकार कार्यकर्ता और प्रमुख समाज सुधारक कैलाश सत्यार्थी ने अपनी नयी किताब ‘करूणा: दी पावर आफ कम्पैशन’ में ये विचार व्यक्त किए हैं।

उन्होंने किताब में लिखा है कि मानवता और हमारे ग्रह के गंभीर खतरे में होने के बीच आज करूणा की बहुत अधिक जरूरत है। वह लिखते हैं कि एक ओर तो दुनिया ऐसे दौर से गुजर रही है जहां उसके पास इतनी अधिक संपदा है जितनी पहले कभी न थी। सूचना तकनीक की प्रगति, बाजार, कारोबार, उत्पादन और उपभोग अपने चरम पर है लेकिन इस बेतहाशा वृद्धि के बावजूद विश्व जल रहा है।

हार्पर कालिन्स द्वारा प्रकाशित किताब ‘करूणा’ में लेखक का कहना था,‘‘ मुक्त संवाद का दायरा सिकुड़ रहा है। शासन, राजनीति, धर्म और अर्थव्यवस्थाओं ने हमें निराश किया है।’’

उनका कहना था कि हर मौजूदा संकट तत्काल नयी अवधारणा की मांग कर रहा है और ऐसे में चुप्पी साध लेना विश्वासघात से कम नहीं है।

उन्होंने किताब में लिखा कि दुनिया पर छाये तमाम संकटों का जवाब करूणा में निहित है और यह समाधान की नई अवधारणा है। उन्होंने कहा, ऐसा इसलिए क्योंकि करूणा ताकत है, करूणा जिम्मेदारी है, करूणा साहस है और करूणा कार्रवाई है।

कैलाश सत्यार्थी की नयी किताब ‘करुणा’ इस भावना की ताकत में असीम संभावनाओं की खोज करती है और साथ ही इस बात को रेखांकित करती है कि सामाजिक और आंतरिक बदलाव में सही मायने में करुणा किस प्रकार से आधारभूत भूमिका निभा सकती है।

सत्रह जनवरी को जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (जेएलएफ) में इस पुस्तक का विमोचन किया जाएगा। किताब तर्क देती है कि ‘करुणा, न्याय, समानता, शांति और स्थिरता का सबसे सुदृढ़ मार्ग है’ क्योंकि यह ‘करुणा के वैश्वीकरण’ का आह्ववान करती है।

‘सत्यार्थी मूवमेंट फॉर ग्लोबल कम्पैशन’ के संस्थापक 72 वर्षीय सत्यार्थी ने पिछले दिनों किताब के संबंध में जारी एक बयान में कहा,‘‘ इस किताब में मैंने एक नयी अवधारणा पेश की है – ‘करुणा लब्धि’। यह व्यक्तियों और संगठनों में करुणा को मापने और बढ़ाने की एक वैज्ञानिक दृष्टि है। आज करुणा कोई चुनाव नहीं है, बल्कि यह मानवता के अस्तित्व के लिए ऑक्सीजन है।’’

उन्होंने कहा,‘‘आपकी सोई हुई करुणा – ‘करुणा’ को जगाकर और ऊपर उठाकर, यह किताब आपको अपने अंदर की समस्या सुलझाने वाले और बदलाव लाने वाले व्यक्तित्व के निर्माण में मदद करेगी।’

कैलाश सत्यार्थी किताब में लिखते हैं,‘‘सिर्फ़ आध्यात्मिकता आज की मुश्किलों को हल नहीं कर सकती। इसलिए, मैं आध्यात्मिक इंजीनियरिंग की ज़ोरदार वकालत करता हूं, जो करूणा को मकसद में बदलना है।

साथ ही किताब में कहा गया है कि भारत केवल ताकत या संपदा के बल पर विश्वगुरू नहीं बन सकता। सत्यार्थी लिखते हैं, ‘‘ करूणा हमारी विरासत है, सभ्यता की नींव है। यह करूणा ही है जो भारत को सच्चे विश्वमित्र में बदल सकती है।’’

बुद्धिमत्ता को मापने के लिए आईक्यू को बीते समय की बात कहते हुए उन्होंने किताब में करूणा लब्धि(सीक्यू) की अवधारणा पेश की है और इसे व्यक्ति के करूणा के स्तर को बढ़ाने और उसके मूल्यांकन का प्रभावी उपकरण बताया है।

भाषा नरेश नरेश पवनेश

पवनेश