उच्चतम न्यायालय झारखंड सिविल सेवा परीक्षा में ‘धांधली’ की सीबीआई जांच संबंधी याचिका पर 24 अगस्त को सुनवाई करेगा

उच्चतम न्यायालय झारखंड सिविल सेवा परीक्षा में ‘धांधली’ की सीबीआई जांच संबंधी याचिका पर 24 अगस्त को सुनवाई करेगा

उच्चतम न्यायालय झारखंड सिविल सेवा परीक्षा में ‘धांधली’ की सीबीआई जांच संबंधी याचिका पर 24 अगस्त को सुनवाई करेगा
Modified Date: August 23, 2026 / 12:22 pm IST
Published Date: August 23, 2026 12:22 pm IST

नयी दिल्ली, 23 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय झारखंड संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित धांधली की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराने की मांग वाली याचिका पर सोमवार को सुनवाई करेगा।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से कार्यकर्ता हरिशरण देवगण द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर सकती है।

याचिका में कहा गया, “भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत यह जनहित याचिका दायर की गई है। इसका उद्देश्य झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा 19 अप्रैल 2026 को विज्ञापन संख्या 01/2026 के तहत आयोजित ‘झारखंड संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक प्रतियोगी परीक्षा-2025’ की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता से जुड़े गंभीर मुद्दों पर अदालत के तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध करना है।”

याचिका में लोक सेवकों और परीक्षा एजेंसियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच के लिए मामले की जांच राज्य अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) से सीबीआई को सौंपने की मांग की गई है।

याचिकाकर्ता ने कहा, “इस मामले को केवल व्यक्तिगत उम्मीदवारों से जुड़े विवाद या धांधली की अलग-अलग घटनाओं के रूप में नहीं देखा जा सकता। आरोपों की जांच में प्रश्नपत्रों की छपाई, कोडिंग, भंडारण, परिवहन और वितरण से लेकर ओएमआर शीट के संग्रह, स्कैनिंग, मूल्यांकन तथा परीक्षा संबंधी इलेक्ट्रॉनिक आंकड़ों तक पहुंच की पूरी प्रक्रिया को शामिल किया जाना चाहिए।”

याचिका में मूल ओएमआर प्रतियों, सीसीटीवी फुटेज और सर्वर के ऑडिट रिकॉर्ड समेत सभी डिजिटल एवं भौतिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है।

याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया कि केवल आरोपों या विरोध-प्रदर्शनों के आधार पर परीक्षा रद्द करने की मांग नहीं की जा रही है। उनका कहना है कि पहले स्वतंत्र और समयबद्ध जांच के जरिए गड़बड़ी की प्रकृति और प्रभाव का निष्पक्ष निर्धारण होना चाहिए। इसके बाद वैज्ञानिक और वस्तुनिष्ठ साक्ष्यों के आधार पर तय किया जाना चाहिए कि प्रारंभिक परीक्षा के परिणामों पर भरोसा किया जा सकता है या नहीं।

भाषा खारी रंजन

रंजन


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