पॉक्सो अदालतों में पीड़ित लड़कों के लिए प्रशासनिक लचीलापन हो: निकम

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पॉक्सो अदालतों में पीड़ित लड़कों के लिए प्रशासनिक लचीलापन हो: निकम

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  • Publish Date - March 10, 2026 / 03:16 PM IST,
    Updated On - March 10, 2026 / 03:16 PM IST

नयी दिल्ली, 10 मार्च (भाषा) राज्यसभा सदस्य उज्ज्वल देवराव निकम ने मंगलवार को सरकार से अनुरोध किया कि पॉक्सो अधिनियम के तहत मामलों की सुनवाई करने वाली अदालतों में कुछ सीमित प्रशासनिक लचीलापन प्रदान किया जाए, ताकि कुछ पीड़ित लड़कों को साक्ष्य देने के दौरान झिझक से राहत मिल सके।

शून्यकाल के दौरान उच्च सदन में यह मुद्दा उठाते हुए मनोनीत राज्यसभा सदस्य ने कहा कि यौन उत्पीड़न से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के कार्यान्वयन में कुछ चुनौतियां हैं।

निकम ने कहा कि महाराष्ट्र की विभिन्न अदालतों में विशेष लोक अभियोजक के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने देखा कि पीड़ित लड़के अत्यंत संवेदनशील घटनाओं में बयान देते समय महिला न्यायाधीशों के समक्ष गहरी झिझक और शर्म महसूस करते हैं।

उन्होंने कहा, “यह मानसिक झिझक कभी-कभी अधूरी गवाही या गवाहों के मुकरने का परिणाम भी देती है। और जब ऐसा होता है, तो अभियोजन कमजोर पड़ जाता है तथा बाल पीड़ित के लिए न्याय का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।”

निकम ने यह स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी न्यायिक अधिकारी की क्षमता या संवेदनशीलता पर सवाल उठाना नहीं है, बल्कि यह स्वीकार करना है कि कुछ लड़कों के लिए अपनी त्रासदी को पुरुष न्यायाधीश के सामने साझा करना आसान हो सकता है।

उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि उच्चतम न्यायालय से परामर्श लेकर यह देखा जाए कि कुछ उपयुक्त मामलों में, प्रशासनिक लचीलापन अपनाते हुए क्या बाल कल्याण पेशेवरों के परामर्श और सिफारिश के आधार पर पुरुष न्यायाधीश की तैनाती की जा सकती है।

निकम ने यह भी कहा कि उचित मानक संचालन प्रक्रियाएं और संवेदनशील तंत्र विकसित किए जाने चाहिए, ताकि अधिनियम के तहत बाल-सुलभ न्याय की भावना हर पीड़ित के लिए पूरी तरह से लागू हो, चाहे पीड़ित लड़की हो या लड़का हो।

भाषा

मनीषा हक

हक