लक्ष्य सेन थोड़े निराश, लेकिन अब ध्यान चोट से उबरने और बड़े टूर्नामेंटों पर

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लक्ष्य सेन थोड़े निराश, लेकिन अब ध्यान चोट से उबरने और बड़े टूर्नामेंटों पर

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  • Publish Date - March 10, 2026 / 05:16 PM IST,
    Updated On - March 10, 2026 / 05:16 PM IST

नयी दिल्ली, 10 मार्च (भाषा)ऑल इंग्लैंड बैडमिंटन चैंपियनशिप के फाइनल में मिली शिकस्त से ‘थोड़े निराश’ भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन ने स्वीकार किया है कि आधुनिक पुरुष एकल मुकाबलों की बढ़ती शारीरिक मांगों के कारण उन्हें अपनी रिकवरी (चोट और थकान से उबरने की प्रक्रिया) और तैयारी की रणनीति पर फिर से विचार करना पड़ रहा है।

लक्ष्य दूसरी बार ऑल इंग्लैंड बैडमिंटन चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचे थे। उन्होंने बर्मिंघम में शारीरिक तौर पर थका देने वाले सप्ताह के दौरान कई कड़े और अधिक समय वाले मुकाबले खेले। उन्हें फाइनल में चीनी ताइपे के लिन चुन-यी से हार का सामना करना पड़ा।

उत्तराखंड के अल्मोड़ा के इस 24 साल के खिलाड़ी ने कहा, ‘‘कुल मिलाकर यह सप्ताह अच्छा लेकिन भावनात्मक रहा। दूसरी बार फाइनल में पहुंचकर भी खिताब नहीं जीत पाना मैच के बाद थोड़ा निराशाजनक लगता है। पूरे टूर्नामेंट को देखें तो कुछ अच्छी जीत मिलीं, अच्छा अभियान रहा और जिस तरह मैंने मैच खेले, उससे आने वाले टूर्नामेंटों के लिए उम्मीदें बनी हैं।’’

लक्ष्य ने इस सप्ताह कोर्ट पर पांच घंटे से अधिक समय बिताया। इसमें एक बेहद कठिन सेमीफाइनल भी शामिल था। इस मुकाबले में उन्हें गंभीर ऐंठन से जूझना पड़ा। इसके बाद फाइनल में उन्हें करीबी हार का सामना करना पड़ा।

उन्होंने कहा कि इस अनुभव ने यह समझ और मजबूत की है कि टूर्नामेंट कार्यक्रम, रिकवरी और व्यवस्थित प्रशिक्षण के बीच संतुलन बनाना कितना जरूरी है।

इस युवा खिलाड़ी ने कहा, ‘‘मैच और टूर्नामेंट अब बहुत ज्यादा शारीरिक हो गए हैं और उम्र के साथ भी फर्क पड़ता है। मेरा मतलब है कि अब मैं 20 साल का नहीं रहा कि उतनी तेजी से रिकवर कर सकूं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं यह नहीं कह रहा कि मेरी उम्र काफी बढ़ गयी है, लेकिन तैयारी, अगले मैचों के लिए रिकवरी और खासकर डाइट (आहार) को लेकर बदलाव करने पड़ते हैं। जब मैं 21–22 साल का था तो जो भी खाता था, उससे वजन नहीं बढ़ता था। लेकिन अब थोड़ा फर्क है और डाइट के प्रति ज्यादा सतर्क रहना पड़ता है।’’

लक्ष्य ने कहा कि व्यस्त कार्यक्रम के कारण ‘वर्कलोड मैनेजमेंट (अभ्यास और टूर्नामेंट के चयन में सतर्कता)’ भी बेहद अहम हो गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘पिछले कुछ वर्षों में मुझे कंधे की कुछ चोटें भी लगीं, जिसका असर पड़ा। पहले मैं आक्रामक शॉट बेहतर खेल रहा था, लेकिन समय के साथ यह समझ आता है कि आप कितना जोर लगा सकते हैं, कितने मैच खेल सकते हैं और कब शरीर को आराम की जरूरत है।’’

इस सत्र में बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप और बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप को प्रमुख आयोजन बताते हुए लक्ष्य ने कहा कि अब वह अपनी टीम के साथ मिलकर ऑल इंग्लैंड अभियान का विश्लेषण करेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘ये दोनों इस साल के बड़े टूर्नामेंट हैं जिनमें मैं खेलूंगा। मैं अपनी टीम के साथ बैठकर विस्तार से विश्लेषण करूंगा कि ऑल इंग्लैंड टूर्नामेंट कैसा रहा और पिछले कुछ महीनों में अभ्यास कार्यक्रम कैसा रहा।’’

लक्ष्य ने कहा, ‘‘इसके बाद कोर्ट पर खास तौर पर अपने खेल को और बेहतर बनाने की कोशिश करूंगा और पूरे सत्र में फिट रहने पर ध्यान दूंगा क्योंकि आगे कई बड़े टूर्नामेंट हैं।’’

लक्ष्य ने मानसिक प्रशिक्षक मोन ब्रोकमैन को भी श्रेय दिया, जिनकी मदद से उन्हें अंतरराष्ट्रीय सर्किट के दबाव को बेहतर तरीके से समझने और संभालने में मदद मिली है।

उन्होंने कहा, ‘‘करीब एक साल से मैं उनके साथ काम कर रहा हूं और मानसिक प्रशिक्षण के बारे में बहुत कुछ सीखा है। बड़े टूर्नामेंट में उतरने का नजरिया भी बदला है। बड़े टूर्नामेंट को अब अलग तरीके से देखता हूं, जबकि 500 या 300 स्तर के टूर्नामेंट अक्सर तैयारी का हिस्सा होते हैं।’’

उन्होंने कहा कि वह अब हार को बहुत गंभीरता से नहीं लेते हैं और कोर्ट पर जमकर मेहनत करते हैं।

लक्ष्य ने कहा, ‘‘मोन, कोच और मेरे पिता सभी मेरा समर्थन करते हैं और मुझे बेहतर बनने में मदद करते हैं। उन्होंने इस प्रक्रिया को देखा है, जहां हर सप्ताह आप जीतते या हारते हैं। कई बार टूर्नामेंट के अंत में लगातार हार भी मिलती है, लेकिन उसे दिल पर नहीं लेना चाहिए और हर मैच से सीखते रहना चाहिए।’’

भाषा

आनन्द सुधीर

सुधीर