नयी दिल्ली, तीन जुलाई (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने जालंधर के एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी को ‘डिजिटल अरेस्ट’ धोखाधड़ी में फंसाकर उनसे 2.07 करोड़ रुपये ठगने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ़्तार किया है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि एजेंसी ने 30 जून को ओडिशा के बालासोर में विवेकानंद दीक्षित और जयंत कुमार आचार्य तथा नागौर (राजस्थान) में कन्हैया लाल के ठिकानों पर तलाशी लेने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया।
एजेंसी के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, ‘‘सीबीआई ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ धोखाधड़ी के सिलसिले में 30 जून को ओडिशा और राजस्थान में सात जगहों पर तलाशी ली। इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।’’
सीबीआई ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के निर्देश पर 25 मार्च को मामला दर्ज किया था।
प्रवक्ता ने कहा कि जांच से पता चला कि धोखाधड़ी से हासिल रकम को एक ट्रस्ट के नाम पर खोले गए बैंक खाते में भेजा गया था।
उन्होंने बताया कि ओडिशा के बालासोर से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि तीसरे आरोपी को नागौर से पकड़ा गया।
‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर अपराध का एक बढ़ता हुआ रूप है, जिसमें अपराधी कानून प्रवर्तन अधिकारियों या सरकारी एजेंसियों के कर्मचारियों के रूप में खुद को पेश करते हैं तथा ऑडियो और वीडियो कॉल के माध्यम से पीड़ितों को डराते-धमकाते हैं और उन पर पैसे देने का दबाव डालते हैं।
भाषा शफीक अविनाश
अविनाश