कोलकाता में निर्माणाधीन गोदाम की छत ढही: तीन की मौत, 18 लोग बचाए गए

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कोलकाता में निर्माणाधीन गोदाम की छत ढही: तीन की मौत, 18 लोग बचाए गए

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  • Publish Date - June 24, 2026 / 07:32 PM IST,
    Updated On - June 24, 2026 / 07:32 PM IST

(तस्वीरों के साथ)

कोलकाता, 24 जून (भाषा) पश्चिम कोलकाता के तारातला इलाके में बुधवार दोपहर तीन मंजिला निर्माणाधीन गोदाम की छत ढह जाने से उसके मलबे के नीचे कई लोग दबे गये। राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने यह जानकारी दी।

शुभेंदु ने घटनास्थल का दौरा किया और बचाव कार्य का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि मलबे के नीचे अब भी कुछ लोग फंसे हुए हैं और उन्हें निकालने के लिए राज्य और केंद्र की एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि बचाव कार्य में सेना की पूर्वी कमान की भी मदद ली जा रही है।

एक अधिकारी ने बताया कि यह गोदाम शहर में श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह की पट्टे पर ली गई जमीन पर बनाया जा रहा था।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘अब तक 21 लोगों को मलबे से निकाला गया, जिनमें से तीन की मौत हो गई है। बाकी लोगों को एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उन्हें बेहतर इलाज मुहैया कराने की हर संभव कोशिश की जा रही है।’’

अस्पताल के पदाधिकारियों ने बताया कि अद्यतन जानकारी के मुताबिक मलबे से निकाले गए 18 लोगों को सरकारी एसएसकेएम अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है, जिनमें से तीन की हालत गंभीर बताई गई है। उन्होंने बताया कि माना जा रहा है कि अस्पताल में भर्ती कराए गए लोग निर्माण स्थल पर मजदूर के तौर पर काम कर रहे थे।

उन्होंने बताया कि गंभीर रूप से घायल मरीजों के इलाज के लिए तंत्रिका तंत्र विशेषज्ञ, हड्डीरोग विशेषज्ञ और जनरल मेडिसिन सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ चिकित्सकों की एक टीम बनाई गई है।

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘तारातला इलाके में ब्रेस पुल के निकट ट्रांसपोर्ट डिपो रोड पर इस गोदाम की छत दोपहर के करीब गिर गई। इस घटना के समय कुछ लोग वहां काम कर रहे थे। हमे कुछ और लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है।’’

घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि निर्माण कार्य के दौरान लोहे के बीम और कंक्रीट के बड़े-बड़े हिस्से ढह गए, जहां कई मज़दूर काम कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उन्होंने मलबे के नीचे फंसे लोगों को मदद के लिए चिल्लाते हुए सुना।

एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, ‘‘भूतल पर पर निर्माण कार्य चल रहा था, जबकि पहली और दूसरी मंज़िल का आरसीसी ढांचा पूरा हो चुका था। अचानक पूरा ढांचा ढह गया।”

शुभेंदु ने बताया, ‘‘सेना ने उन लोगों से संपर्क कर लिया है जो अब भी मलबे में फंसे हुए हैं।’’ उनके मुताबिक कंक्रीट के बड़े-बड़े टुकड़ों को हटाने की ज़रूरत के मद्देनजर बचाव अभियान को पूरा करने में काफी समय लग सकता है।

अग्निशमन विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक,ढलाई के दौरान तीन मंज़िला गोदाम की छत ढह गई। उन्होंने आरोप लगाया कि गोदाम के निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा था।

अधिकारियों ने बताया कि कोलकाता पुलिस, आपदा प्रबंधन समूह, नागरिक सुरक्षा और अग्निशमन एवं आपात सेवा की टीम घटनास्थल पर बचाव कार्य में जुटी हुई है। उन्होंने कहा कि सेना के अधिकारी भी बचाव कार्य में मदद कर रहे हैं जबकि गिर चुके लोहे के बीम को हटाने के लिए क्रेन और मशीनों को लगाया गया है।

अधिकारियों के अनुसार लोहे और कंक्रीट को काटने के लिए गैस कटर का इस्तेमाल किया जा किया गया तथा बचावकर्मी ‘वर्टिकल ड्रिलिंग’ के ज़रिए मलबे में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि एनडीआरएफ की टीम मलबे के नीचे फंसे लोगों का पता लगाने के लिए खोजी कुत्तों और ड्रोन की मदद ले रही है।

कोलकाता पुलिस के आपदा प्रबंधन दल के एक सदस्य ने कहा, ‘‘हम मलबे के नीचे से आ रही मदद की पुकार को सुन वहां तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही, हम दबे हुए लोगों को भरोसा दिला रहे हैं कि उन्हें जल्द ही बचा लिया जाएगा।”

सेना ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘ मध्य कोलकाता के तारातला इलाके में निर्माणाधीन एक गोदाम के अचानक ढह जाने के बाद, भारतीय सेना की पूर्वी कमान की चार टुकड़ियों को तुरंत खोज और बचाव अभियान के लिए भेजा गया।’’

सेना ने कहा, ‘‘नागरिक प्रशासन द्वारा मदद की अपील किये जाने के तुरंत बाद, सेना के बचाव कर्मियों, विशेषज्ञ अभियंताओं और चिकित्सा कर्मियों की टीम बचाव कार्यों में मदद करने के लिए पहुंची।’’

भारतीय सेना ने कहा कि एनडीआरएफ, राज्य आपदा प्रबंधन बल (एसडीआरएफ) और कोलकाता पुलिस के साथ मिलकर, उसके जवान कंक्रीट के भारी मलबे के नीचे फंसे माने जा रहे कई लोगों को खोजने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

सेना ने कहा, ‘‘सेना के वरिष्ठ अधिकारी बचाव कार्यों का समन्वय कर रहे हैं। पूर्वी कमान फंसे हुए नागरिकों की सुरक्षा और भलाई के लिए प्रार्थना करती है और भरोसा दिलाती है कि उन्हें बचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।’’

इस घटना के बाद, राज्य सचिवालय में आपदा प्रबंधन समूह का नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है।

शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘इस त्रासदी में गई कीमती जानों पर मेरे दुख को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। मैं शोक-संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। इस अकल्पनीय दुख की घड़ी में राज्य सरकार मजबूती से उनके साथ खड़ी है और हम उन्हें हर संभव सहायता प्रदान करेंगे।’’

उन्होंने युद्ध स्तर पर चल रहे समन्वित बचाव कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि सेना, एनडीआरएफ,एसडीआरएफ, कोलकाता पुलिस और केएमसी मिलकर बचाव कार्य कर रहे हैं ताकि फंसे हुए हर कर्मियों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। साथ ही, मुख्यमंत्री ने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

कुछ स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि इलाके में कुछ समय से बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण कार्य किए जा रहे थे।

मंत्री इंद्रनील खान ने कहा, “हम निश्चित रूप से दुर्घटना के कारणों और किसी भी तरह की अनियमितता की जांच करेंगे। लेकिन अभी प्राथमिकता ज्यादा से ज्यादा पीड़ितों को बचाने की है।”

घटनास्थल पर मौजूद कोलकाता नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक शुरुआती जांच में इमारत की डिज़ाइन और निर्माण में खामियों के सबूत मिले हैं, जिनकी वजह से यह हादसा हो सकता है।

मौके पर मौजूद एक सिविल इंजीनियर ने कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि ऊपर बने कंक्रीट का वजन संभालने के लिए लोहे की बीम मज़बूत नहीं थीं। साथ ही, मुझे कोई ब्रेस भी नहीं दिख रहे हैं, जिनकी ज़रूरत आरसीसी ढलाई को सहारा देने के लिए होती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमें यह देखना होगा कि क्या ढांचे के डिजाइन को नगर निकाय से मंजूरी मिली थी और अगर मिली थी तो क्या निर्माण उसी के अनुरूप हो रहा था।’’

पश्चिम बंगाल की शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल और कोलकाता नगर निगम की आयुक्त स्मिता पांडे भी घटनास्थल पर पहुंचीं। कोलकाता पुलिस के आयुक्त अजय नंद घटनास्थल पर बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे हैं।

घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता राकेश सिंह ने आशंका जताई थी कि कई पीड़ितों की मौत बचाव कार्य शुरू होने से पहले ही चोटों के कारण हो गई होगी।

भाषा धीरज माधव

माधव