कोलकाता, 16 मार्च (भाषा) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में निर्वाचन आयोग द्वारा वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के फेरबदल को ‘एक ऐसी पार्टी की घबराहट भरी प्रतिक्रिया’ बताया, जिसे यह एहसास हो गया है कि वह लोकतांत्रिक तरीकों से चुनाव नहीं जीत सकती, जबकि विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने इस फेरबदल को ‘स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की दिशा में एक कदम’ बताया।
पश्चिम बंगाल के चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद निर्वाचन आयोग ने राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती , गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीना, पुलिस महानिदेशक पीयूष पाण्डेय और कोलकाता पुलिस आयुक्त सुप्रतीम सरकार को हटा दिया।
आयोग ने कहा कि हटाए गए अधिकारियों को चुनाव से जुड़ा कोई दायित्व नहीं दिया जाएगा। चुनाव तैयारियों की समीक्षा के बाद यह फैसला लिया गया।
टीएमसी के प्रवक्ता कुनाल घोष ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि “……..राजनीति” के बावजूद भाजपा पश्चिम बंगाल की जनता और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच के संबंध को कमजोर नहीं कर पाएगी।
उन्होंने कहा कि भाजपा नीत केंद्र सरकार राज्यपाल या वरिष्ठ अधिकारियों को बदल सकती है, लेकिन पश्चिम बंगाल के मतदाताओं की सोच नहीं बदल सकती।
घोष ने भाजपा पर निर्वाचन आयोग को “अपने संगठन की तरह इस्तेमाल” करने और मुख्य सचिव तथा डीजीपी समेत शीर्ष अधिकारियों के जल्दबाजी में तबादले कराने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, “आप जिसे चाहें बदल लें, लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को नहीं बदल सकते। वह भारत की शेरनी हैं और जितना विपक्ष उन्हें निशाना बनाएगा, पार्टी उतनी ही मजबूत होकर उभरेगी।”
टीएमसी प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि आयोग ने राज्य की पहली महिला मुख्य सचिव को “मनमाने और अलोकतांत्रिक तरीके से” हटाया है।
उन्होंने केंद्र सरकार पर मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं के लिए राज्य के 1.96 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बकाया राशि रोकने का भी आरोप लगाया।
वहीं राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने उन अधिकारियों को फिर से जिम्मेदारी दी है जिन्हें ममता बनर्जी सरकार ने “पार्टी लाइन पर न चलने” के कारण किनारे कर दिया था।
उन्होंने कहा कि ईमानदार और निष्पक्ष आईएएस व आईपीएस अधिकारियों को अब कानून-व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी दी गई है, जिससे शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित हो सके।
विधानसभा में भाजपा के मुख्य सचेतक शंकर घोष ने आरोप लगाया कि राज्य की नौकरशाही का एक हिस्सा सत्तारूढ़ टीएमसी के सहयोगी की तरह काम कर रहा था।
उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग का हस्तक्षेप चुनावी निष्पक्षता के लिए जरूरी था और इससे अन्य अधिकारियों को भी संदेश गया है।
माकपा की केंद्रीय समिति के सदस्य सुजन चक्रवती ने कहा कि चुनाव के दौरान अधिकारियों का फेरबदल सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन पश्चिम बंगाल प्रशासन के आचरण ने इस बार ऐसी कार्रवाई को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बना दिया है।
उन्होंने कहा कि सबसे जरूरी बात यह है कि मतदाता बिना किसी दबाव के अपनी इच्छा के अनुसार मतदान कर सकें और निर्वाचन आयोग को अपनी निष्पक्षता बनाए रखनी चाहिए।
भाषा राखी नरेश
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