टीएमसी के बागी गुट की ममता को चुनौती: नंदीग्राम उपचुनाव लड़ें, हम उम्मीदवार नहीं उतारेंगे

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टीएमसी के बागी गुट की ममता को चुनौती: नंदीग्राम उपचुनाव लड़ें, हम उम्मीदवार नहीं उतारेंगे

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  • Publish Date - September 9, 2026 / 11:47 PM IST,
    Updated On - September 9, 2026 / 11:47 PM IST

कोलकाता, नौ सितंबर (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न के लिए जारी लड़ाई अब नंदीग्राम उपचुनाव तक पहुंच गई है। बागी गुट ने पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी से वहां से चुनाव लड़ने को कहा है और वादा किया है कि वे उनके खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं उतारेंगे।

बुधवार को सार्वजनिक रूप से दिया गया यह प्रस्ताव एक अपील भी है और एक चुनौती भी। 2021 में नंदीग्राम में बनर्जी को अपने करियर का सबसे बड़ा चुनावी झटका लगा था; उन्होंने इस सीट को भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ अपने अभियान का मुख्य केंद्र बनाया था, लेकिन वह अपने ही पूर्व सहयोगी और भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी से हार गईं।

इसके अलावा, टीएमसी का बागी गुट अपनी चुनावी साख साबित करने की होड़ में लगा है, जबकि पार्टी के नाम और ‘घास पर दो फूल’ वाले चुनाव चिह्न पर उसका दावा अब भी निर्वाचन आयोग के पास लंबित हैं।

पश्चिम बंगाल विधानसभा के बाहर बागी टीएमसी गुट के प्रवक्ता रिजु दत्ता ने कहा, “अगर ममता बनर्जी नंदीग्राम से चुनाव लड़ती हैं, तो हम अपना उम्मीदवार नहीं उतारेंगे। हम चाहते हैं कि वह चुनाव लड़ें, जीतें और विधानसभा लौटें।”

इस साल हुए विधानसभा चुनावों में, अधिकारी ने नंदीग्राम से जीत हासिल की और साथ ही बनर्जी को उनके गढ़ भवानीपुर में भी हराया। उन्होंने भवानीपुर की सीट अपने पास रखी और दूसरी सीट छोड़ दी, जिससे उपचुनाव की जरूरत पड़ी।

टीएमसी के एक और बागी विधायक मदन मित्रा ने कहा कि इस फैसले का मकसद भाजपा-विरोधी वोट के बंटवारे को रोकना और बनर्जी को नंदीग्राम में आसानी से जीत दिलाना था।

मित्रा ने कहा, “अगर ममता बनर्जी नंदीग्राम से चुनाव लड़ती हैं, तो हम अपना कोई उम्मीदवार नहीं उतारेंगे। इससे यह साबित होगा कि हमने भाजपा को विपक्ष के वोट बांटने का मौका नहीं दिया है।” उन्होंने यह बात उस आरोप के संदर्भ में कही जिसमें बागी गुट को सत्तारूढ़ दल की ‘बी-टीम’ बताया जा रहा है।

यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब टीएमसी के दो प्रतिद्वंद्वी गुट नंदीग्राम और रेजीनगर में छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव की तैयारी कर रहे हैं, जबकि निर्वाचन आयोग ने अब तक यह तय नहीं किया है कि पार्टी के मान्यता प्राप्त नाम और चुनाव चिह्न पर किस गुट का हक है।

भाषा प्रशांत सुरभि

सुरभि