नई दिल्ली। Petrol and Diesel Prices may Increase मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिला है। ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। इसके बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें फिलहाल स्थिर हैं। इससे देश की तेल विपणन कंपनियों पर दबाव बढ़ गया है। ICRA के कॉरपोरेट रेटिंग्स के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और को-ग्रुप हेड प्रशांत वशिष्ठ के मुताबिक, सितंबर में अब तक की औसत कीमत के आधार पर फ्यूल रिटेलर्स को पेट्रोल पर करीब 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 23 रुपये प्रति लीटर की नेगेटिव मार्केटिंग मार्जिन का सामना करना पड़ रहा है। घरेलू LPG पर भी करीब 200 रुपये प्रति सिलेंडर की अंडर-रिकवरी बताई गई है। Petrol and Diesel Prices may Increase
Petrol Price Hike Update पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर दिखाई दे रहा है। ब्रेंट क्रूड में करीब 2.5 फीसदी की तेजी आई और इसकी कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड करीब 2 फीसदी बढ़कर 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। ब्रेंट क्रूड इससे पहले 23 जुलाई को 100 डॉलर प्रति बैरल का स्तर पार कर चुका था।
भारत के लिए चिंता इसलिए ज्यादा है क्योंकि देश को अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करना पड़ता है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संस्था पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के अनुसार, 8 सितंबर को भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत बढ़कर 108.91 डॉलर प्रति बैरल हो गई। अगस्त में भारतीय क्रूड बास्केट की औसत कीमत 90.19 डॉलर प्रति बैरल थी। यानी अगस्त की औसत कीमत की तुलना में 8 सितंबर तक कच्चा तेल करीब 20 फीसदी महंगा हो चुका है।
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के दाम तीन महीने से अधिक समय से स्थिर हैं। खुदरा कीमतों में आखिरी बदलाव 25 मई को किया गया था। उस समय पेट्रोल में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी। इससे पहले मई के दूसरे हिस्से में पश्चिम एशिया में युद्ध और खाड़ी देशों से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के बीच तेल की कीमतों में तेजी आई थी। उस दौरान चार चरणों में पेट्रोल 7.35 रुपये और डीजल 7.53 रुपये प्रति लीटर महंगा किया गया था।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक और उपभोक्ता है। देश अपनी कुल क्रूड जरूरत का 88 फीसदी से अधिक हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर भारतीय तेल कंपनियों की लागत और देश के आयात बिल पर पड़ता है। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लगातार महंगा हो रहा है, जबकि घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। यदि तेल की कीमतों में तेजी लंबे समय तक जारी रहती है, तो भारतीय फ्यूल रिटेलर्स पर वित्तीय दबाव और बढ़ सकता है।