जानबूझ कर ऋण नहीं चुकाने वाली शीर्ष 10 इकाइयों पर बैंकों का 40,635 करोड़ रुपये बकाया

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जानबूझ कर ऋण नहीं चुकाने वाली शीर्ष 10 इकाइयों पर बैंकों का 40,635 करोड़ रुपये बकाया

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  • Publish Date - March 16, 2026 / 09:13 PM IST,
    Updated On - March 16, 2026 / 09:13 PM IST

नयी दिल्ली, 16 मार्च (भाषा) सरकार ने सोमवार को लोकसभा को बताया कि जानबूझ कर ऋण नहीं चुकाने वाली शीर्ष 10 इकाइयों पर 31 मार्च 2025 तक बैंकों का 40,635 करोड़ रुपये बकाया था। इनमें एबीजी शिपयार्ड, गीतांजलि जेम्स तथा हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर तथा राकेशकुमार कुलदीपसिंह वधावन शामिल हैं।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड पर बैंकों का 6,695 करोड़ रुपये का बकाया है और वह जानबूझ कर ऋण नहीं चुकाने वालों की सूची में शीर्ष स्थान पर है। उसके बाद, गीतांजलि जेम्स (6,236 करोड़ रुपये) और बीटा नेफ्थोल (5,268 करोड़ रुपये) तथा राकेशकुमार कुलदीपसिंह वधावन (4,291 करोड़ रुपये) का स्थान है।

इसके अलावा, भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड के पूर्व निदेशकों पर बैंकों का 3,810 करोड़ रुपये, रजा टेक्सटाइल्स पर 3,260 करोड़ रुपये, गिल्ट पैक पर 3,080 करोड़ रुपये, रैंक इंडस्ट्रीज पर 2,655 करोड़ रुपये और हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर पर 2,540 करोड़ रुपये का बकाया है।

मंत्री ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकों को जानबूझकर ऋण नहीं चुकाने वालों और बड़े चूककर्ताओं की सूची सभी ‘क्रेडिट सूचना कंपनियों’ (सीआईसी) को मासिक आधार पर सौंपने की सलाह दी है और सीआईसी को उनकी वेबसाइट पर इसे प्रदर्शित करने को कहा गया है।

सीतारमण ने बताया कि आरबीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोई बैंक जानबूझकर चूक करने वालों के रूप में वर्गीकृत खातों के संबंध में समझौता कर सकता है और इस तरह के उधारकर्ताओं के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसा किया जाएगा।

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में, वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार, आरबीआई और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) के समन्वित प्रयासों के कारण पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल भुगतान लेनदेन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।

उन्होंने कहा कि खुदरा डिजिटल भुगतान वित्त वर्ष 2022 के 457.44 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 849.12 लाख करोड़ रुपये हो गया।

सीतारमण ने कहा कि कुल खुदरा डिजिटल भुगतान लेनदेन में, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) का हिस्सा 2024-25 में 81 प्रतिशत था और यह दुनिया की सबसे बड़ी ‘रीयल-टाइम’ खुदरा भुगतान प्रणाली के रूप में उभरा है।

उन्होंने कहा कि डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी से निपटने के लिए सरकार, आरबीआई और एनपीसीआई द्वारा कई पहल की गई हैं।

वित्त मंत्री ने बताया कि इनमें ग्राहक के मोबाइल नंबर और उपकरण के बीच ‘डिवाइस बाइंडिंग, पिन’ के माध्यम से प्रमाणीकरण, दैनिक लेनदेन सीमा और कुछ विशिष्ट उपयोगों पर प्रतिबंध शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि एनपीसीआई सभी बैंकों को संदिग्ध लेनदेन की चेतावनी देने और उन्हें अस्वीकार करने के लिए ‘कृत्रिम मेधा/मशीन लर्निंग’ आधारित धोखाधड़ी निगरानी समाधान प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि आरबीआई और बैंक साइबर अपराध की रोकथाम के लिए एसएमएस, रेडियो पर जागरूकता अभियान और अन्य प्रचार सामग्री के माध्यम से जागरूकता अभियान भी चला रहे हैं।

भाषा सुभाष रमण

रमण