डीआरडीओ के शीर्ष अधिकारी ने उद्योग जगत, शैक्षणिक संस्थानों से की शोध को बढ़ावा देने की अपील

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डीआरडीओ के शीर्ष अधिकारी ने उद्योग जगत, शैक्षणिक संस्थानों से की शोध को बढ़ावा देने की अपील

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  • Publish Date - March 13, 2026 / 04:50 PM IST,
    Updated On - March 13, 2026 / 04:50 PM IST

अहमदाबाद, 13 मार्च (भाषा) रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि भारत में बौद्धिक संपदा अधिकार के क्षेत्र में सीमित काम और शोध गतिविधियों में ‘ठहराव’ चिंताजनक प्रवृत्ति है।

उन्होंने उद्योग जगत और शैक्षणिक संस्थानों से अपील की कि वे अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए आगे आएं और इस दिशा में अपने प्रयास तेज करें।

डीआरडीओ के ‘रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट’ (इंजीनियर्स) के निदेशक मकरंद जी जोशी ने कहा कि भारतीय उद्योग कुछ क्षेत्रों में अच्छे हैं, जैसे कि उपकरण (टूल्स) बनाने में, लेकिन जब बात डिज़ाइन तकनीक और ‘प्रोसेस डेवलपमेंट’ की आती है, तो उनके पास उल्लेखनीय बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) लगभग न के बराबर हैं।

उन्होंने इस स्थिति को सुधारने के लिए उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों से अनुसंधान और नवाचार पर अधिक ध्यान देने की अपील की।

उन्होंने अहमदाबाद विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित ‘कंपोजिट मैटेरियल्स एंड टेक्नोलॉजीज पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन’ में कहा, ‘‘ पिछले 20 वर्षों में चीन आगे बढ़ा है। जबकि हम किसी हद तक ठहराव की स्थिति में हैं। सामान्य तौर पर शोध पर हम जो पैसा खर्च कर रहे हैं, वह जीडीपी के प्रतिशत के रूप में 15 साल पहले की तुलना में कम है। इसलिए यह एक चिंताजनक प्रवृत्ति है।’’

उन्होंने वैमानिकी अनुसंधान और विकास बोर्ड पैनल के चेयरपर्सन के रूप में लगभग छह साल तक काम करने के अपने अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि इस दौरान उन्हें यह अच्छी तरह समझने का मौका मिला कि विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में परियोजनाओं को किस तरह वित्तपोषित किया जाता है।

जोशी ने कहा, ‘‘मुझे यह कहते हुए खेद है कि इनका स्तर काफी खराब है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ इसलिए, मैं यहां मौजूद सभी युवाओं से अपील करता हूं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया है: भारत को 2047 तक विकसित भारत बनना है। यह तभी संभव है जब हममें से प्रत्येक सकारात्मक योगदान दे। इस प्रयास में केवल डीआरडीओ जैसे अनुसंधान संगठनों का ही महत्व नहीं है, मुख्य रूप से उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों को ही इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।’’

भाषा

शोभना नरेश

नरेश