नयी दिल्ली, 16 अप्रैल (भाषा) राज्यसभा में बृहस्पतिवार को सदन की पूर्व सदस्य मोहसिना किदवई और पार्श्च गायिका आशा भोसले को श्रद्धांजलि दी गई।
सदन की बैठक शुरू होने पर राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन ने मोहसिना किदवई और आशा भोसले के निधन का जिक्र किया।
सभापति ने कहा कि उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में एक जनवरी 1932 को पैदा हुईं मोहसिना किदवई कम उम्र से ही राजनीति में सक्रिय रहीं। उनका आठ अप्रैल को 94 वर्ष की उम्र में निधन हो गया।
उन्होंने बताया कि किदवई ने 2004 से 2010 तक और 2010 से 2016 तक राज्यसभा में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया था। उनका विशिष्ट राजनीतिक करियर छह दशक से अधिक लंबा रहा। किदवई को चार अलग-अलग विधायी सदनों – उत्तर प्रदेश विधानसभा और विधान परिषद तथा संसद के दोनों सदनों की सदस्य बनने का गौरव प्राप्त हुआ। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ ही केंद्र में मंत्री के रूप में कार्य किया।
सभापति ने कहा कि किदवई ने कमजोर तबके के कल्याण के लिए भी काम किया।
राधाकृष्ण ने भारतीय फिल्म संगीत में उत्कृष्ट योगदान देने वाली पार्श्व गायिका आशा भोसले के निधन का जिक्र करते हुए कहा कि वह देश की सबसे बहुमुखी प्रतिभासंपन्न और लोकप्रिय आवाजों में से एक थीं।
आशा भोसले का गत 12 अप्रैल को मुंबई में निधन हो गया। वह 92 वर्ष की थीं। आठ सितंबर, 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में जन्मीं आशा भोंसले ने संगीत और सिनेमा जगत में अपना एक अनूठा मुकाम हासिल किया।
सभापति ने कहा कि आठ दशक से अधिक लंबे अपने करियर में, आशा भोसले ने कई भारतीय भाषाओं में हजारों गीतों को अपनी मधुर आवाज दी और भारतीय संगीत के परिदृश्य पर एक अमिट छाप छोड़ी।
उन्होंने कहा कि संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए, उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जिनमें पद्म विभूषण, दादासाहेब फाल्के पुरस्कार और राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार शामिल हैं। इसके अलावा उन्हें कई राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय सम्मान भी प्राप्त हुए।
उन्होंने कहा कि पार्श्च गायिका आशा भोसले के निधन से देश ने एक महान आवाज, एक अद्वितीय कलाकार और एक सांस्कृतिक प्रतीक को खो दिया है, जिनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।
सदन में सदस्यों ने कुछ पल मौन रखकर मोहसिना किदवई और आशा भोसले को श्रद्धांजलि दी।
भाषा अविनाश मनीषा
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