तृणमूल ने भाजपा पर पुलिस के दुरुपयोग का लगाया आरोप, राष्ट्रपति, राज्यपाल से मिलने का मांगा समय
तृणमूल ने भाजपा पर पुलिस के दुरुपयोग का लगाया आरोप, राष्ट्रपति, राज्यपाल से मिलने का मांगा समय
कोलकाता, तीन सितंबर (भाषा) तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में कथित ‘‘अराजकता’’ और भाजपा सरकार द्वारा पुलिस के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठाने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और राज्यपाल आर एन रवि से मुलाकात का समय मांगा है।
तृणमूल के राज्यसभा सदस्य डेरेक ओ’ब्रायन ने बृहस्पतिवार को कहा कि पार्टी ने दोनों संवैधानिक पदाधिकारियों को पत्र लिखकर तत्काल मुलाकात का समय मांगा है।
कैमक स्ट्रीट स्थित पार्टी कार्यालय में बृहस्पतिवार तड़के कथित तोड़फोड़ की घटना के बाद तृणमूल ने राज्य की भाजपा सरकार पर हमला तेज कर दिया।
डेरेक ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार पुलिस का ‘‘व्यवस्थित तरीके से दुरुपयोग’’ कर रही है और राज्य में ‘‘पूरी तरह अराजकता’’ की स्थिति है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले चार महीनों से स्थिति लगातार बिगड़ रही है, तृणमूल कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा निशाना बनाया जा रहा है, पार्टी कार्यालयों में तोड़फोड़ की जा रही है और पुलिस नियमों का पालन नहीं कर रही है।
तृणमूल नेता ने कहा कि पार्टी ने राष्ट्रपति और राज्यपाल दोनों से संपर्क किया है, क्योंकि वह उनके समक्ष राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति और पुलिस मशीनरी के कथित राजनीतिक इस्तेमाल का मुद्दा उठाना चाहती है।
डेरेक ने कहा, ‘‘हमने भारत के राष्ट्रपति को पत्र लिखा है और तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल को भी पत्र लिखकर बंगाल की चिंताजनक स्थिति पर चर्चा के लिए तृणमूल प्रतिनिधिमंडल से तत्काल मुलाकात का समय मांगा है। पत्र आज सुबह भेजे गए हैं।’’
यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब राज्य में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गया है। भाजपा अब सत्ता में है, जबकि तृणमूल विपक्ष में है।
तृणमूल भी दो प्रतिद्वंद्वी धड़ों में बंट गई है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला धड़ा विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के आमने-सामने है। पार्टी ने हाल के महीनों में कानून-व्यवस्था और पुलिस की कथित ज्यादतियों को अपने अभियान का प्रमुख मुद्दा बनाया है।
पार्टी ने अपने आरोपों के समर्थन में पिछले कुछ महीनों में अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं से जुड़ी कई घटनाओं का हवाला दिया है।
तीस मई को तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर कथित तौर पर उस समय हमला किया गया था, जब वह सोनारपुर में मारे गए पार्टी कार्यकर्ता के परिवार से मिलने जा रहे थे। आरोप है कि उन पर अंडे फेंके गए थे।
महुआ मोइत्रा और सौगत राय समेत तृणमूल नेताओं पर अंडे फेंके जाने को लेकर भी इसी तरह के आरोप लगाए गए।
पार्टी ने भाजपा सरकार पर उसके राजनीतिक कार्यक्रमों को सीमित करने के लिए पुलिस का इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया है।
ममता बनर्जी ने 28 अगस्त को एक रैली में आरोप लगाया था कि पुलिस तृणमूल की बैठकों और जुलूसों को अनुमति नहीं दे रही है।
उन्होंने कहा था कि यदि आधिकारिक अनुमति नहीं दी गई तो वह ‘‘जनता की अनुमति’’ लेंगी।
ताजा विवाद कैमक स्ट्रीट स्थित तृणमूल कार्यालय पर तड़के कथित हमले को लेकर हुआ।
अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि हथियारों से लैस लोगों का एक समूह सुबह करीब 4.30 बजे पार्टी कार्यालय में घुसा, कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की, उनके फोन छीन लिए और कार्यालय में तोड़फोड़ की, जबकि पुलिस कथित तौर पर मूकदर्शक बनी रही।
उन्होंने कहा था, ‘‘अगर हथियारों से लैस लोगों का एक समूह सुबह 4.30 बजे किसी राजनीतिक दल के कार्यालय में घुस सकता है, कार्यकर्ताओं पर हमला कर सकता है, फोन छीन सकता है और कार्यालय में तोड़फोड़ कर सकता है तथा पुलिस उदासीन बनी रहती है, तो पश्चिम बंगाल में कानून के शासन के लिए क्या बचता है?’’
तृणमूल अब इन घटनाओं के साथ-साथ महिलाओं पर हमले और विपक्ष की आवाज दबाने के आरोपों को राष्ट्रपति और राज्यपाल के समक्ष उठाने की तैयारी कर रही है।
दोनों संवैधानिक पदाधिकारियों से संपर्क करना विपक्षी दल की भाजपा सरकार के खिलाफ लड़ाई को राजनीतिक मंच से आगे ले जाने और राज्य प्रशासन तथा पुलिस के कामकाज पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। भाजपा सरकार ने इन आरोपों पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
भाषा
राखी माधव
माधव

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