तृणमूल विधायक मदन मित्र ममता नीत गुट के प्रदर्शन में शामिल हुए

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तृणमूल विधायक मदन मित्र ममता नीत गुट के प्रदर्शन में शामिल हुए

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  • Publish Date - July 17, 2026 / 05:15 PM IST,
    Updated On - July 17, 2026 / 05:15 PM IST

कोलकाता, 17 जुलाई (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक मदन मित्रा ऋतब्रत बनर्जी नीत बागी गुट में शामिल होने के दो दिन बाद शुक्रवार को अचानक पश्चिम बंगाल विधानसभा में ममता बनर्जी नीट गुट के विधायकों द्वारा आयोजित एक विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। इससे विपक्षी खेमे में बढ़ते अंदरूनी खींचतान का संकेत मिलता है।

कमरहटी के विधायक मित्रा ने बुधवार को घोषणा की थी कि वह ऋतब्रत बनर्जी नीत गुट के साथ हैं, लेकिन साथ ही यह भी कहा था कि उन्होंने तृणमूल नहीं छोड़ी है। इसके बाद वह ‘कालीघाट’ गुट (ममता बनर्जी समर्थक) के उस धरने में शामिल हुए, जो कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में और राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा (नीट) विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के लिए आयोजित किया गया था।

विरोध प्रदर्शन में उनकी मौजूदगी ने कई विधायकों को चौंका दिया और तृणमूल के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष के साथ हल्की-फुल्की बातचीत का मौका भी दिया। घोष पार्टी में बिखराव के बावजूद ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़े हैं।

घोष ने मुस्कुराते हुए मित्रा का स्वागत करते हुए मजाकिया लहजे में कहा कि भले ही वरिष्ठ विधायक विरोधी खेमे में ‘शारीरिक रूप से चले गए’ हों, लेकिन ‘उनका दिल अब भी यहीं है’।

घोष ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा मित्रा की पत्नी और बेटे को नोटिस भेजे जाने का ज़िक्र करते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोधियों पर दबाव बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विधायक को ‘‘कुछ दिनों तक जो मन में आए, वह कहने दें।’’

घोष ने कहा कि ममता के विरोधी गुट के भीतर ‘अपना ही एक आदमी’ मौजूद है।

इस बातचीत के दौरान मुस्कुराते नजर आए मित्रा ने बाद में घोष पर परोक्ष रूप से तंज कसा।

मित्रा ने संवाददाताओें से कहा, ‘‘मुझे लगता है कि जल्द ही उनका हौसला टूटने वाला है।’’ उनके बयान से इंगित होता है कि आने वाले दिनों में ममता बनर्जी नीट गुट से और भी नेता पाला बदल सकते हैं।

मित्रा ने प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर कहा कि विधानसभा में ऋतब्रत बनर्जी के चैंबर से निकलने के बाद वह महज शिष्टाचार के नाते वहां रुके थे। उन्होंने कहा कि इसका अभिप्राय यह नहीं है कि उनके राजनीतिक रुख में कोई बदलाव आया है।

उन्होंने परिवार के सदस्यों को ईडी के समन पर कहा कि वे जांच में सहयोग करेंगे।

भाषा धीरज दिलीप

दिलीप