तृणमूल सांसद डेरेक ओ’ब्रायन और अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक कोलकाता पुलिस के समक्ष पेश हुए
तृणमूल सांसद डेरेक ओ’ब्रायन और अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक कोलकाता पुलिस के समक्ष पेश हुए
कोलकाता, दो सितंबर (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य डेरेक ओ’ब्रायन यहां पार्टी नेता अभिषेक बनर्जी के कार्यालय में एक होर्डिंग को हटाए जाने को लेकर हुई झड़प के मामले में बुधवार को कोलकाता पुलिस के समक्ष पेश हुए। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
अधिकारी ने बताया कि ओ’ब्रायन सुबह करीब 10 बजे शेक्सपियर सरणी थाने पहुंचे। उनके बाद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित रॉय भी थाने पहुंचे।
अधिकारी ने कहा, ‘‘तृणमूल सांसद से घटना के विभिन्न पहलुओं को लेकर पूछताछ की गई।’’
अभिषेक बनर्जी भी मंगलवार को पुलिस के सामने पेश हुए थे और 27 अगस्त को हुई घटना के संबंध में उनसे कई घंटे तक पूछताछ की गई थी।
पुलिस ने बताया कि तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को दो प्राथमिकियों में आरोपी बनाया गया है, जबकि राज्यसभा सदस्य ओ’ब्रायन और पूर्व विधायक हुमायूं कबीर समेत कुछ अन्य लोगों के नाम भी इन मामलों में दर्ज हैं।
पुलिस ने इससे पहले ओ’ब्रायन को सोमवार को पेश होने के लिए समन भेजा था, लेकिन उन्होंने नोटिस मिलने और पेश होने की तय तारीख के बीच कम समय होने का हवाला देते हुए कुछ और समय मांगा था।
हालांकि, पुलिस ने उनका अनुरोध ठुकराते हुए एक और नोटिस जारी किया और उन्हें बुधवार को पेश होने का निर्देश दिया।
अधिकारी ने कहा, ‘‘हम मामलों में नामजद सभी लोगों से पूछताछ कर रहे हैं और उपलब्ध सबूतों की जांच कर रहे हैं। संबंधित लोगों के बयान जांच के रूप में दर्ज किए जा रहे हैं।’’
पुलिस के अनुसार, आरोपों में सरकारी अधिकारियों को उनके कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा डालना, गैरकानूनी तरीके से एकत्र होना, मारपीट और महिला कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार करना शामिल है।
कैमैक स्ट्रीट स्थित अभिषेक बनर्जी के कार्यालय की इमारत की सबसे ऊपरी मंजिल पर सड़क की ओर लोहे के ढांचे पर तृणमूल कांग्रेस के चिह्न वाला एक होर्डिंग लगाया गया था। पुलिस की मौजूदगी में इमारत में प्रवेश करने के बाद कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के कर्मचारियों ने इसे हटा दिया था। इस दौरान बनर्जी के कार्यालय के निजी सुरक्षाकर्मियों और अधिकारियों के बीच झड़प हुई थी।
ओ’ब्रायन ने पहले आरोप लगाया था कि पुलिस एक ‘‘अवैध’’ नोटिस लेकर कार्यालय में जबरन घुसी, वरिष्ठ नेताओं के साथ मारपीट की और पार्टी समर्थकों तथा कार्यालय के कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार किया।
उन्होंने निजी सुरक्षाकर्मियों द्वारा पुलिस को रोके जाने संबंधी खबरों को भी ‘‘फर्जी’’ बताया था।
अब तक इस घटना के सिलसिले में 14 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
भाषा गोला मनीषा
मनीषा

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