तृणमूल ने 1993 की पुलिस गोलीबारी का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए किया: शुभेंदु अधिकारी
तृणमूल ने 1993 की पुलिस गोलीबारी का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए किया: शुभेंदु अधिकारी
कोलकाता, 20 जुलाई (भाषा) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 1993 की पुलिस गोलीबारी की जांच रिपोर्ट सोमवार को विधानसभा में पेश की। इस गोलीबारी में युवा कांग्रेस के 13 कार्यकर्ताओं की मौत हुई थी।
अधिकारी ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार ने 12 वर्षों तक आयोग की रिपोर्ट को दबाए रखा और इस त्रासदी का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए किया।
यह रिपोर्ट 21 जुलाई को आयोजित ‘शहीद दिवस’ कार्यक्रमों से एक दिन पहले सार्वजनिक की गई है। इस कदम ने एक बार फिर उस घटना को चर्चा के केंद्र में ला दिया, जो तीन दशक से अधिक समय से ममता बनर्जी की राजनीतिक यात्रा का अहम हिस्सा रही है।
अधिकारी ने आरोप लगाया कि पिछली टीएमसी सरकार ने न तो न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) सुशांत चटर्जी आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया और न ही उसकी प्रमुख सिफारिशों को लागू किया। इनमें पीड़ित परिवारों के लिए बढ़ा हुआ मुआवजा देने की सिफारिश भी शामिल थी।
एक सदस्यीय इस आयोग का गठन वर्ष 2011 में ममता बनर्जी सरकार ने किया था। आयोग ने 300 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज करने के बाद वर्ष 2014 में अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी थी।
विधानसभा अध्यक्ष की अनुमति से सचिवालय को रिपोर्ट सौंपने के बाद सदन में अधिकारी ने गोलीबारी के समय की तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार और पिछली टीएमसी सरकार, दोनों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी सरकार ने आयोग का गठन करने के बावजूद उसकी रिपोर्ट को दबाए रखा।
आयोग को 21 जुलाई, 1993 को तत्कालीन राज्य सचिवालय ‘राइटर्स बिल्डिंग’ की ओर मार्च कर रहे युवा कांग्रेस समर्थकों पर पुलिस गोलीबारी की जांच का जिम्मा सौंपा गया था। उस घटना में 13 लोगों की मौत हो गई थी।
उस समय ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल युवा कांग्रेस की अध्यक्ष थीं। उन्होंने 1998 में कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस का गठन किया था।
आयोग की रिपोर्ट के कुछ अंश पढ़ते हुए अधिकारी ने कहा कि जांच में निष्कर्ष निकाला गया कि पुलिस गोलीबारी की कोई स्थिति नहीं थी और बल प्रयोग को ‘‘अनावश्यक, अनुचित और बिना उकसावे के’’ बताया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आयोग ने मृतकों के परिवार को 25-25 लाख रुपये और प्रत्येक घायल व्यक्ति को पांच लाख रुपये मुआवजा देने की सिफारिश की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी सरकार ने न तो इन सिफारिशों को लागू किया और न ही मुआवजे का भुगतान किया। उन्होंने कहा कि मृतकों के शोकाकुल परिवारों को केवल 2 लाख रुपये और घायलों को 15,000 रुपये की राशि दी गई।
इसे शहीदों के परिवारों के साथ विश्वासघात बताते हुए अधिकारी ने घोषणा की कि पीड़ित परिवार नयी प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए स्वतंत्र होंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध कराएगी। अधिकारी ने वादा किया कि उनकी सरकार मुख्यमंत्री राहत कोष से आयोग द्वारा अनुशंसित मुआवजे की शेष राशि का भुगतान करेगी।
भाषा आशीष अविनाश
अविनाश

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