नयी दिल्ली, छह मार्च (भाषा) जनवरी में तुर्कमान गेट स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास तोड़ फोड़ अभियान के दौरान हुई पत्थरबाजी की घटना के सिलसिले में न्यायिक हिरासत में रखे गए अंतिम आरोपी को दिल्ली की एक अदालत ने जमानत दे दी है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश भूपिंदर सिंह ने शाहनवाज आलम को 50,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही रकम की जमानत राशि पर जमानत दे दी।
अदालत ने 28 फरवरी के एक आदेश में जमानत की समानता के सिद्धांत के आधार पर शाहनवाज को जमानत दे दी। अदालत के अनुसार आलम के मामले में और इस घटना में शामिल अन्य 19 आरोपियों के मामले में कुछ अलग नहीं था। अन्य आरोपियों को फरवरी में पहले ही जमानत दी जा चुकी थी।
अदालत ने कहा, ‘‘यह भी निर्विवाद है कि समान परिस्थितियों वाले सह-आरोपियों को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 109(1) (हत्या का प्रयास) की प्रयोज्यता, गैरकानूनी सभा से संबंधित आरोपों और व्हाट्सएप समूहों के माध्यम से सामग्री के कथित प्रसार पर विस्तृत विचार-विमर्श के बाद पहले ही जमानत दी जा चुकी है।’’
अदालत ने कहा, “यह भी विवादित नहीं है कि समान परिस्थितियों में शामिल अन्य सह-आरोपियों को पहले ही जमानत दी जा चुकी है, जबकि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 109(1) (हत्या का प्रयास), अवैध जमावड़े से जुड़े आरोपों और व्हाट्सऐप ग्रुप के माध्यम से कथित रूप से सामग्री के प्रसार पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जा चुका है।”
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा रिकॉर्ड पर रखे गए वीडियो साक्ष्य से आरोपी की पहचान निर्णायक रूप से स्थापित नहीं हो सकी क्योंकि उसका चेहरा स्पष्ट रूप से नहीं दिख रहा था और उसकी पहचान सुनिश्चित करने के लिए फोरेंसिक जांच अब भी जारी है।
अदालत ने यह भी पाया गया कि घायल पुलिस अधिकारियों द्वारा की गई पहचान पर इस स्तर पर पूरी तरह से भरोसा नहीं किया जा सकता है और मुकदमे के दौरान साक्ष्यों के मूल्यांकन की आवश्यकता होगी।
अदालत ने 25 फरवरी को इस मामले में छह आरोपियों को जमानत दे दी थी। इससे पहले 17 फरवरी को अदालत ने इस मामले में 12 आरोपियों को जमानत दी थी। इस मामले में पहली बार 24 जनवरी को जमानत दी गई थी, जब एक अलग सत्र अदालत ने उबैदुल्ला को जमानत दी थी, जबकि 20 जनवरी के पहले जमानत आदेश को दिल्ली उच्च न्यायालय ने रद्द करते हुए मामले को फिर से सत्र अदालत के पास भेज दिया था।
भाषा सुरभि रंजन
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