दो नयी एसटीपी परियोजनाओं से उत्तर प्रदेश में अपशिष्ट जल प्रबंधन मजबूत होगा
दो नयी एसटीपी परियोजनाओं से उत्तर प्रदेश में अपशिष्ट जल प्रबंधन मजबूत होगा
नयी दिल्ली, 21 अगस्त (भाषा) उत्तर प्रदेश में दो अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र (एसटीपी) परियोजनाओं के लिए रियायत समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं, ताकि वाराणसी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर में अपशिष्ट जल प्रबंधन को मजबूत किया जा सके। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
एनएमसीजी ने बताया कि वाराणसी के लोहता में 6 करोड़ लीटर प्रति दिन और पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर में 4.5 करोड़ लीटर प्रति दिन क्षमता वाले एसटीपी की स्थापना से जुड़े समझौतों पर दिल्ली स्थित मिशन मुख्यालय में हस्ताक्षर किए गए।
एनएमसीजी के मुताबिक, लोहता एसटीपी दुर्गा नाले से वरुण नदी में बहने वाले अपशिष्ट जल को रोकेगा और उसका शोधन करेगा। यह नदी आगे चलकर आदि केशव घाट के पास गंगा में मिल जाती है।
एनएमसीजी के अनुसार, पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर में स्थापित किया जाने वाला एसटीपी रेलवे नाला और गंदा नाला के जरिये गंगा में गिरने वाले अपशिष्ट जल का शोधन करेगा।
एनएमसीजी ने बताया कि दोनों परियोजनाओं को हाइब्रिड एन्युटी आधारित सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत लागू किया जाएगा।
‘हाइब्रिड एन्युटी’ सार्वजनिक-निजी भागीदारी की एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें परियोजना के निर्माण चरण के दौरान सरकार कुल लागत का 40 फीसदी वित्त पोषण करती है, जबकि बाकी 60 फीसदी राशि निजी विकासकर्ता जुटाता है।
दोनों एसटीपी परियोजनाओं का क्रियान्वयन उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) कर रहा है, जबकि वाराणसी लोहता एसटीपी प्राइवेट लिमिटेड और वाराणसी डीडीयू नगर एसटीपी प्राइवेट लिमिटेड इनकी रियायतग्राही हैं।
एनएमसीजी के महानिदेशक राजीव कुमार मित्तल की मौजूदगी में उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) वाराणसी के अधीक्षण अभियंता जनार्दन सिंह, एनएमसीजी के उप सचिव (वित्त) महेश कुमार कश्यप और संबंधित रियायतग्राही कंपनियों के निदेशक पीयूष जैन ने दोनों समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
भाषा पारुल पवनेश
पवनेश

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