उमर खालिद वृत्तचित्र विवाद: आईआईआईटी-हैदराबाद ने आठ छात्रों को ‘अनुशासनात्मक चेतावनी’ जारी की

उमर खालिद वृत्तचित्र विवाद: आईआईआईटी-हैदराबाद ने आठ छात्रों को ‘अनुशासनात्मक चेतावनी’ जारी की

उमर खालिद वृत्तचित्र विवाद: आईआईआईटी-हैदराबाद ने आठ छात्रों को ‘अनुशासनात्मक चेतावनी’ जारी की
Modified Date: September 21, 2026 / 08:52 pm IST
Published Date: September 21, 2026 8:52 pm IST

नयी दिल्ली, 21 सितंबर (भाषा) इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी-हैदराबाद (आईआईआईटी-हैदराबाद) ने उस स्वतंत्र कैंपस मंच से जुड़े आठ छात्रों को ‘‘अनुशासनात्मक चेतावनी’’ जारी की है जो जाति, मेधा और राजनीति जैसे मुद्दों पर चर्चा शुरू करने का प्रयास कर रहा था।

संस्थान ने कहा कि यह समूह उसके द्वारा अधिकृत नहीं है।

स्नातक के ये छात्र ‘नो टायरंट्स, नो साइलेंस’ (एनटीएनएस) नामक मंच से संबंधित हैं। इस मंच ने जेल में बंद कार्यकर्ता उमर खालिद पर बनी एक वृत्तचित्र की 18 सितंबर को परिसर में स्क्रीनिंग का प्रस्ताव किया था, जिस पर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने आपत्ति जताई थी। इसके बाद स्क्रीनिंग रद्द कर दी गई थी।

यह समूह परिसर में फैसले लेने की प्रक्रिया, जाति और राजनीतिक भागीदारी जैसे मुद्दों पर चर्चा आयोजित कर चुका है।

आईआईआईटी-हैदराबाद के रजिस्ट्रार प्रो. के. एस. राजन के हस्ताक्षर वाला ‘‘तत्काल अनुपालन और अनुशासनात्मक चेतावनी’’ संबंधी नोटिस 18 सितंबर को जारी किया गया।

इस मामले पर प्रतिक्रिया के लिए प्रो. राजन से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब फिलहाल नहीं मिला है।

‘पीटीआई-भाषा’ ने ऐसा एक नोटिस देखा है जिसमें, ‘‘छात्रों पर एनटीएनएस के नाम से अनधिकृत सोशल मीडिया हैंडल, ऑनलाइन पेज और वेबसाइट’’ संचालित करने का आरोप लगाया गया है, जिनमें आईआईआईटी-हैदराबाद का नाम प्रमुखता से इस्तेमाल किया गया है। नोटिस में ये भी आरोप लगाए गए कि समूह ने आंतरिक बैठकों की कार्यवाही प्रकाशित की, जो संस्थान के अनुसार ‘‘पूरी तरह गोपनीय और केवल आंतरिक प्रशासन के लिए’’ थीं।

संस्थान ने कहा कि एनटीएनएस ‘‘आईआईआईटी-हैदराबाद के तहत कोई स्वीकृत या मान्यता प्राप्त निकाय नहीं है।’’

नोटिस में कहा गया, ‘‘संस्थान के नाम और ब्रांड का अनधिकृत इस्तेमाल तथा गोपनीय आंतरिक बैठक की कार्यवाही प्रकाशित करना संस्थान की नीतियों, छात्र आचरण और गोपनीयता दिशानिर्देशों का गंभीर उल्लंघन है।’’

छात्रों को चार घंटे के भीतर उन सोशल मीडिया हैंडल, वेबसाइट और अन्य सामग्री को हटाने को कहा गया, जिनमें आईआईआईटी-हैदराबाद का उल्लेख था या कथित तौर पर आंतरिक बैठक की कार्यवाही प्रकाशित की गई थी।

नोटिस में चेतावनी दी गई थी कि 18 सितंबर को रात साढ़े आठ बजे तक निर्देशों का पालन नहीं करने पर ‘‘तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी’’ और यह कार्रवाई ‘‘संस्थान से निष्कासन’’ तक जा सकती है।

सूत्रों के अनुसार, कुछ छात्रों ने व्यक्तिगत रूप से जवाब देते हुए इस कार्रवाई के आधार पर सवाल उठाए और संस्थान से यह स्पष्ट करने को कहा कि कौन से नियम छात्रों को स्वतंत्र समूह संचालित करने, अपनी लिखी सामग्री प्रकाशित करने या खुद की पहचान आईआईआईटी-हैदराबाद के छात्र के रूप में कराने से रोकते हैं।

उन्होंने संस्थान द्वारा एनटीएनएस की प्रकाशित सामग्री को ‘‘गोपनीय आंतरिक बैठक की कार्यवाही’’ बताए जाने पर भी आपत्ति जताई। छात्रों का कहना था कि संबंधित बैठक सभी के लिए खुली थी और प्रतिभागियों को यह नहीं बताया गया था कि उसकी कार्यवाही गोपनीय है।

उमर खालिद पर वृत्तचित्र को लेकर विवाद से पहले भी एनटीएनएस परिसर में सक्रिय था।

मार्च में इसने ‘हू डज योर साइलेंस प्रोटेक्ट?’ शीर्षक से एक चर्चा आयोजित की थी, जिसमें खास तौर पर उन छात्रों को आमंत्रित किया गया था, जिनका मानना है कि वे संस्थान में ‘‘पढ़ाई करने आए हैं, राजनीति करने नहीं।’’

इस आमंत्रण में संस्थान की मेस नीति और अनुशासनात्मक प्रक्रियाओं से जुड़े विवादों का उल्लेख करते हुए कहा गया था कि फैसलों को बिना सवाल स्वीकार करने की आदत ‘‘केवल परिसर तक सीमित नहीं रहती, बल्कि हमारे साथ आगे बढ़ती है।’’

एनटीएनएस ने छात्रों के साथ बातचीत के लिए अखिल भारतीय छात्र संघ (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को भी आमंत्रित किया था। इसका उद्देश्य परिसर की चर्चाओं में राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को शामिल करना था।

इससे पहले 17 सितंबर को सीबीएफसी ने कहा था कि बिना प्रमाणन वाली किसी वृत्तचित्र की सार्वजनिक स्क्रीनिंग सिनेमैटोग्राफ अधिनियम का उल्लंघन होगी, जब तक कि उसे विशेष छूट न मिली हो। बोर्ड ने यह टिप्पणी फिल्मकार ललित वाचानी की डॉक्यूमेंट्री ‘‘प्रिजनर नंबर 626710 इज प्रेजेंट’’ की प्रस्तावित स्क्रीनिंग के संदर्भ में की थी।

उसने आईआईटाई-हैदराबाद को टैग करते हुए कहा गया कि संस्थान के अधिकारी ‘ज़रूरी कार्रवाई के लिए इस पर ध्यान दें।’’

भाषा शोभना सुभाष

सुभाष


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