केंद्रीय गृह सचिव ने हिमनद झीलों से बाढ़, हिमस्खलन से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की

केंद्रीय गृह सचिव ने हिमनद झीलों से बाढ़, हिमस्खलन से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की

केंद्रीय गृह सचिव ने हिमनद झीलों से बाढ़, हिमस्खलन से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की
Modified Date: September 3, 2026 / 04:20 pm IST
Published Date: September 3, 2026 4:20 pm IST

नयी दिल्ली, तीन सितंबर (भाषा) केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हिमनद झीलों से बाढ़ और हिमस्खलन के जोखिमों से निपटने की तैयारियों की बृहस्पतिवार को समीक्षा की।

गृह मंत्रालय ने कहा कि बैठक में प्रारंभिक चेतावनी, संवेदनशील हिमनद झीलों और बर्फ से ढके क्षेत्रों की निगरानी, उच्च जोखिम वाले स्थानों की पहचान, संभावित जल-प्रवाह मार्गों का निर्धारण, चेतावनियों का समय पर प्रसार, निकासी की तैयारियों तथा प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिवों तथा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए), केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी), भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) और रक्षा भू-सूचना विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान (डीजीआरई) के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने संवेदनशील हिमनद झीलों की निगरानी, प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करने, चेतावनियों के अंतिम छोर तक समयबद्ध प्रसार में सुधार, जल-प्रवाह मार्गों की योजना, सामुदायिक स्तर पर तैयारियों तथा संवेदनशील क्षेत्रों में आवश्यक प्रतिक्रिया संसाधनों की तैनाती सहित अपनी-अपनी तैयारियों और शमन रणनीतियों से अवगत कराया।

राज्य, केंद्र शासित प्रदेश-विशिष्ट संवेदनशीलताओं और तैयारियों के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि शमन संबंधी उपायों को जिला और स्थानीय स्तर पर ठोस कार्रवाई में परिणत किया जाए।

केंद्रीय गृह सचिव ने विशेष रूप से जोखिम की स्थिति बढ़ने के दौरान संवेदनशील हिमनद झीलों तथा हिमस्खलन संभावित क्षेत्रों की निरंतर और सक्रिय निगरानी की आवश्यकता पर जोर दिया।

मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह दी गई कि वे राज्य की एजेंसियों, जिला प्रशासन तथा वैज्ञानिक एवं तकनीकी संस्थानों के बीच निकट समन्वय बनाए रखें, ताकि चेतावनियों पर तत्काल और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।’’

बैठक का समापन अंतर-एजेंसी समन्वय को निरंतर बनाए रखने, जोखिम संबंधी सूचनाओं के नियमित आदान-प्रदान तथा प्रारंभिक चेतावनी और प्रतिक्रिया तंत्र को और मजबूत करने के निर्देशों के साथ हुआ, ताकि संवेदनशील हिमालयी क्षेत्रों में जनहानि और संपत्ति के नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।

भाषा आशीष मनीषा

मनीषा


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