सोशल मीडिया पर प्रसारित बिना हस्ताक्षर वाला पत्र मनगढ़ंत : नृपेंद्र मिश्र

सोशल मीडिया पर प्रसारित बिना हस्ताक्षर वाला पत्र मनगढ़ंत : नृपेंद्र मिश्र

सोशल मीडिया पर प्रसारित बिना हस्ताक्षर वाला पत्र मनगढ़ंत : नृपेंद्र मिश्र
Modified Date: August 21, 2026 / 03:45 pm IST
Published Date: August 21, 2026 3:45 pm IST

अयोध्या (उप्र), 21 अगस्त (भाषा) राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने सोशल मीडिया पर प्रसारित बिना हस्ताक्षर वाले एक कथित पत्र को मनगढ़ंत बताया है।

यह पत्र कथित तौर पर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के नाम से जारी हुआ है, जिसमें मंदिर परिसर के निर्माण और प्रबंधन से जुड़े फैसलों में मिश्र की प्रमुख भूमिका का दावा किया गया है।

अयोध्या में पत्रकारों से बातचीत में मिश्र ने कहा कि उन्होंने ऐसा कोई पत्र नहीं देखा और मीडिया पर झूठ फैलाकर विवाद पैदा करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, ‘‘जब तक मैं पत्र नहीं देख लेता, मैं यही कहूंगा कि शायद यह आपकी मनगढ़ंत कहानी है।’’

इस डिजिटल पत्र के बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद कई मीडिया संस्थानों ने इसकी खबर प्रकाशित की। इस पर 18 अगस्त की तारीख है।

पीटीआई-भाषा ने चंपत राय से संपर्क कर इसकी पुष्टि की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

कथित पत्र में कहा गया है कि मिश्र के सुझाव पर मंदिर निर्माण के लिए लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) का चयन किया गया और उन्होंने निर्माण समिति में अपनी पसंद के लोगों को शामिल किया।

इसमें एनबीसीसी के पूर्व चेयरमैन अनूप मित्तल के बैठकों में नियमित रूप से शामिल होने तथा मंदिर निर्माण से जुड़े ‘‘हर फैसले’’ में मिश्र की प्रमुख भूमिका का दावा भी किया गया है।

पत्र में मंदिर निर्माण जून 2020 में शुरू होकर जून 2026 तक पूरा होने की बात कही गई है।

पत्र में अनूप मित्तल को मिश्र का इंजीनियरिंग सलाहकार और उनके बेटे यश मित्तल को बैठकों की कार्यवाही टाइप करने वाला बताया गया है। हालांकि, बिना हस्ताक्षर वाले पत्र के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

विहिप के एक पदाधिकारी ने भी इसकी प्रमाणिकता की पुष्टि करने में असमर्थता जताई। चंपत राय विहिप के उपाध्यक्ष हैं।

चंदा चोरी के विवाद के बीच राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा देने के बावजूद वह अयोध्या में सक्रिय हैं। 22 जुलाई को संतों की बैठक के बाद कुछ संतों ने उन्हें फिर से पद पर बहाल करने की मांग की थी।

भाषा सं आनंद मनीषा रंजन

रंजन


लेखक के बारे में