बंगाल विधानसभा में हंगामा: कुणाल घोष ने बागी तृणमूल विधायकों को ‘सरकार की कठपुतली’ करार दिया

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बंगाल विधानसभा में हंगामा: कुणाल घोष ने बागी तृणमूल विधायकों को ‘सरकार की कठपुतली’ करार दिया

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  • Publish Date - July 22, 2026 / 07:51 PM IST,
    Updated On - July 22, 2026 / 07:51 PM IST

कोलकाता, 22 जुलाई (भाषा) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) विधायक कुणाल घोष ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में वक्ताओं की सूची से उनका नाम हटाए जाने के लिए बुधवार को पार्टी से अलग हुए बागी विधायकों की कड़ी आलोचना की और आरोप लगाया कि वे (बागी विधायक) कठपुतली हैं जिन्हें सरकार द्वारा नियंत्रित और निर्देशित किया जाता है।

घोष ने यह बात तब कही जब उन्हें सदन से बाहर निकाल दिया गया और बाद में दिन भर के लिए निलंबित कर दिया गया। यह कार्रवाई तब हुई जब उन्होंने गृह विभाग के बजट पर चर्चा के दौरान बोलने की मांग को लेकर हंगामा किया।

बेलेघाटा के विधायक ने विपक्ष के मुख्य सचेतक अखरुज्जमां से सवाल किया कि उन्हें बहस में हिस्सा क्यों नहीं लेने दिया जा रहा है। अखरुज्जमां टीएमसी के ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के नेता हैं।

घोष ने आरोप लगाया, ‘‘यह तथाकथित विपक्ष असल में भाजपा की बी-टीम है, जो भाजपा के नियंत्रण में है। वे कठपुतलियां हैं जिन्हें सरकार निर्देशित और नियंत्रित करती हैं। उन्होंने बहस के असली मुद्दों से बचने के लिए ‘छद्म’ वक्ताओं को सूची में शामिल किया है ताकि भाजपा खाली मैदान पर गोल कर सके।’’

विधानसभा में तब भारी हंगामा हुआ जब टीएमसी के ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले ‘कालीघाट’ गुट के नेता घोष को मार्शल द्वारा बाहर निकाल दिया गया और बाद में दिन भर के लिए निलंबित कर दिया गया। उन्होंने बहस के दौरान अखरुज्जमां को बोलने से रोककर कार्यवाही में बाधा डाली थी।

एक ही पार्टी के दो विरोधी गुटों के बीच विधानसभा के अंदर आमने-सामने की बहस का यह अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला। इससे एक दिन पहले ही कोलकाता में 21 जुलाई की अपनी-अपनी रैलियों में दोनों विरोधी गुटों ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए थे।

इन घटनाओं ने संकट से जूझ रही टीएमसी के भीतर की दरारों को और उजागर कर दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘अखरुज्जमां ने मुझे बताया कि उन्हें ऊपर से निर्देश मिले थे कि वे मुझे बोलने न दें। मैं जानना चाहता हूं कि ऊपर से निर्देश देने वाला वह व्यक्ति कौन है? क्या वह विपक्ष के नेता (रितब्रत बनर्जी) हैं या उनके राजनीतिक गुरु (भाजपा से) हैं?’’

घोष ने शुभेंदु अधिकारी पर भी निशाना साधा और कहा कि बहस के दौरान विधानसभा में उनका भाषण ‘गृह विभाग के बजट पर चर्चा के आधिकारिक जवाब के बजाय टीएमसी के खिलाफ किसी जनसभा में दिए गए भाषण जैसा लग रहा था।’’

भाषा संतोष नरेश

नरेश