उत्तराखंड सरकार देहरादून में पेड़ों की अवैध कटाई पर दो सप्ताह के भीतर जवाब दे : उच्च न्यायालय

उत्तराखंड सरकार देहरादून में पेड़ों की अवैध कटाई पर दो सप्ताह के भीतर जवाब दे : उच्च न्यायालय

उत्तराखंड सरकार देहरादून में पेड़ों की अवैध कटाई पर दो सप्ताह के भीतर जवाब दे : उच्च न्यायालय
Modified Date: June 6, 2026 / 12:01 am IST
Published Date: June 6, 2026 12:01 am IST

नैनीताल, पांच जून (भाषा) उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को राज्य सरकार को देहरादून के एक गांव में कथित रूप से पेड़ों की अवैध कटाई और शिकायतकर्ताओं के सामाजिक बहिष्कार के मामले की गई कार्रवाई का विस्तृत विवरण के साथ दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की पीठ ने देहरादून के विकासनगर क्षेत्र में स्थित ग्राम सभा तौली से संबंधित एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।

मामले का गंभीर संज्ञान लेते हुए न्यायालय ने राज्य सरकार से पूछा कि ग्रामीणों द्वारा इस साल 20 जनवरी को शिकायत दर्ज कराने के बाद क्या कदम उठाए गए।

यह याचिका ग्राम सभा तौली के छह ग्रामीणों ने दायर की है जिनमें गोपाल सिंह और विनोद कुमार चौहान भी शामिल हैं।

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि जनवरी 2026 में उनके गांव में बड़ी संख्या में पेड़ काट दिए गए जिसके बाद उन्हें वन विभाग के अधिकारियों को उसकी जांच के लिए एक शिकायत देनी पड़ी।

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) द्वारा की गई जांच में पुष्टि हुई कि 54 पेड़ काटे गए और शाखाओं की अत्यधिक छंटाई के कारण 29 अन्य पेड़ों को गंभीर क्षति पहुंची। डीएफओ की रिपोर्ट में पीपल और आम के पेड़ों सहित कई प्रजातियों के वृक्षों को हुए नुकसान का उल्लेख किया गया है।

याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि जांच रिपोर्ट में नुकसान की पुष्टि होने के बावजूद दोषियों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

याचिका में यह भी कहा गया कि वृक्षों के काटने का विरोध करने वाले छह ग्रामीणों को सामाजिक बहिष्कार झेलना पड़ा। ग्राम सभा में उनके खिलाफ जुर्माना लगाने और ग्राम स्तर पर उनका सामाजिक बहिष्कार करने का प्रस्ताव पारित किया गया।

सुनवाई के दौरान पीठ ने इन आरोपों पर गहरी चिंता व्यक्त की। अदालत ने राज्य सरकार को प्रारंभिक शिकायत और उसके बाद जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा उठाए गए कदमों को स्पष्ट करते हुए विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

भाषा सं दीप्ति धीरज

धीरज


लेखक के बारे में