उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने प्रशासनिक गलती के कारण मिली अतिरिक्त पेंशन की वसूली को सही ठहराया

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने प्रशासनिक गलती के कारण मिली अतिरिक्त पेंशन की वसूली को सही ठहराया

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने प्रशासनिक गलती के कारण मिली अतिरिक्त पेंशन की वसूली को सही ठहराया
Modified Date: July 28, 2026 / 04:30 pm IST
Published Date: July 28, 2026 4:30 pm IST

नैनीताल, 28 जुलाई (भाषा) उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने कोष विभाग की त्रुटि के कारण करीब आठ वर्ष तक पेंशन के ‘कम्यूटेड हिस्से’ की कटौती नहीं होने से मिली अतिरिक्त राशि की वसूली को चुनौती देने वाली एक सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी की याचिका को खारिज कर दिया।

पेंशन का ‘कम्यूटेड हिस्से’ का अर्थ है कि पेंशन का वह भाग जिसे सेवानिवृत्त कर्मचारी भविष्य की मासिक पेंशन के बदले एकमुश्त (लंपसम) राशि के रूप में पहले ही प्राप्त कर लेता है।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने पिछले सप्ताह सुनवाई के दौरान कहा कि याचिकाकर्ता अतिरिक्त राशि अपने पास रखने का हकदार नहीं था।

अदालत ने कहा कि एकमुश्त राशि प्राप्त करने के बावजूद पूरी पेंशन का भुगतान जारी रहने की जानकारी विभाग को देना उसकी भी जिम्मेदारी थी।

अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता 31 जुलाई 2017 को टिहरी गढ़वाल जिले में क्षेत्राधिकारी (सीओ) के पद से सेवानिवृत्त हुए थे।

उन्हें अक्टूबर 2017 में 18.99 लाख रुपये की ‘कम्यूटेशन’ राशि का भुगतान किया गया था।

पेंशन भुगतान आदेश (पीपीओ) के अनुसार, नवंबर 2017 से उनकी पेंशन में हर महीने 19,320 रुपये की कटौती होनी थी लेकिन विभागीय त्रुटि के कारण यह कटौती शुरू नहीं हुई और उन्हें पूरी पेंशन मिलती रही।

हालांकि बाद में लेखा परीक्षण (ऑडिट) के दौरान यह गलती सामने आई। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि त्रुटि के लिए विभाग जिम्मेदार था और सेवानिवृत्त कर्मचारी होने के कारण नियमित ‘कम्यूटेशन’ कटौती के अतिरिक्त हर महीने 20,000 रुपये की वसूली से उन्हें आर्थिक कठिनाई हो रही है।

राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि वसूली के बावजूद याचिकाकर्ता को हर महीने 37,310 रुपये पेंशन के रूप में मिल रहे हैं और वसूली की जा रही राशि पर कोई ब्याज नहीं लगाया जा रहा है।

उच्च न्यायालय ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि प्रशासनिक त्रुटि के कारण मिली अतिरिक्त पेंशन पर याचिकाकर्ता का कोई अधिकार नहीं बनता, विशेषकर तब जब वह ‘कम्यूटेशन’ की एकमुश्त राशि पहले ही प्राप्त कर चुका हो।

अदालत ने वसूली की दर को भी उचित ठहराते हुए कहा कि बकाया राशि की वसूली में अब भी कई वर्ष लगेंगे।

भाषा सं दीप्ति जितेंद्र

जितेंद्र


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