उत्तराखंड में बारिश से मरने वालों की संख्या 52 हुई; पांच लोग अब भी लापता

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उत्तराखंड में बारिश से मरने वालों की संख्या 52 हुई; पांच लोग अब भी लापता

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  • Publish Date - October 20, 2021 / 11:13 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:23 PM IST

देहरादून/नयी दिल्ली, 20 अक्टूबर (भाषा) भारी बारिश से प्रभावित उत्तराखंड में बुधवार को छह और शव बरामद किए गए, जिससे इस राज्य में मरने वालों की संख्या बढ़कर 52 हो गई। बारिश के चलते हुए भूस्खलन से अनेक सड़कें अवरुद्ध हो गई हैं और अनेक गांवों में बिजली आपूर्ति भी ठप हो गई है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार नष्ट मकानों के मलबे से आज छह और शव मिले। पांच लोग अब भी लापता हैं तथा बारिश से जुड़ी घटनाओं में 17 घायल हुए हैं।

उत्तराखंड में लापता लोगों के आधिकारिक आंकड़ों में एक ट्रेकिंग टीम के वे 11 सदस्य शामिल नहीं हैं जो उत्तरकाशी से रवाना हुए थे, लेकिन पड़ोसी हिमाचल प्रदेश के चितकुल में अपने गंतव्य पर नहीं पहुंच पाए।

रविवार रात से शुरू हुई बारिश से सबसे अधिक कुमाऊं क्षेत्र प्रभावित हुआ है, जिसके अतंर्गत नैनीताल भी आता है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्थिति का जायजा लेने के लिए कुमाऊं के उधम सिंह नगर और चंपावत जिलों के प्रभावित इलाकों का दौरा किया। उन्होंने सड़क मार्ग से यात्रा की क्योंकि उनका हेलीकॉप्टर तकनीकी कारणों से हल्द्वानी से उड़ान नहीं भर सका।

केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री और नैनीताल से सांसद अजय भट्ट तथा राज्य आपदा प्रबंधन मंत्री धन सिंह रावत के साथ, धामी उधम सिंह नगर जिले में जलभराव वाले स्थानों को पार करने के लिए एक ट्रैक्टर पर सवार हुए।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘खड़ी फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है, घरों में पानी घुस गया है। मैं प्रभावित इलाकों में घर-घर जा रहा हूं ताकि लोगों का दर्द बांट सकूं।’

अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह राज्य में हालात का जायजा लेने के लिए बुधवार रात राजधानी देहरादून पहुंच सकते हैं। वह बृहस्पतिवार सुबह प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण भी कर सकते हैं।

बुधवार को पूरे उत्तराखंड में मौसम साफ हो गया, जिससे बचाव कार्यों को गति मिली और चारधाम यात्रा आंशिक रूप से फिर से शुरू हुई जिससे तीर्थयात्रियों को केदारनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री जाने की अनुमति मिली। हालांकि, बद्रीनाथ की यात्रा फिर से शुरू नहीं की जा सकी क्योंकि मंदिर की ओर जाने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग कई जगहों पर भूस्खलन से अवरुद्ध हो गया है।

राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) ने कहा कि उसने उत्तराखंड के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से 1,300 से ज्यादा लोगों को बचाया है और बचाव दल की टीमों की संख्या बढ़ाकर 15 से 17 कर दी है।

एनडीआरएफ की छह टीम उधमसिंह नगर में, दो-दो टीम उत्तरकाशी, चमोली में और एक-एक टीम देहरादून, चंपावत, पिथौरागढ़ और हरिद्वार में तैनात है।

पर्यटन शहर नैनीताल में बुधवार को स्थिति सामान्य हुई।

गोला नदी में उफान के चलते नैनीताल में काठगोदाम रेलवे स्टेशन की पटरियों को नुकसान पहुंचा है।

पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि काठगोदाम में क्षतिग्रस्त पटरियों की मरम्मत में चार या पांच दिन लग सकते हैं।

नैनीताल में बुधवार सुबह हालात सामान्य हुए और बारिश थमने से पर्यटक बाजार में शॉपिंग करने और पर्यटन के लिए निकले। शहर में टैक्सियां आम दिनों की तरह चलती दिखाई दीं।

उत्तर प्रदेश से आए एक पर्यटक ने कहा, ”मंगलवार को लगातार बारिश होने के कारण हम अपने होटल में ही बंद रहने को मजबूर हुए।”

बुधवार सुबह तक सड़क से पानी लगभग पूरी तरह हट चुका था। नैनी झील के उफान पर होने से पानी सड़कों पर आ गया था और जलभराव से चलना मुश्किल हो गया था।

अधिकारियों ने बताया कि शहर में बारिश के कारण प्रभावित हुई बिजली आपूर्ति और फोन सेवाओं को बहाल कर दिया गया है। हालांकि, दूर-दराज के गांवों में अभी आपूर्ति प्रभावित है।

नैनीताल के जिलाधिकारी धीरज गर्बियाल ने कहा कि मौसम में सुधार के साथ ही दिन के दौरान राहत एवं पुनर्वास कार्यों में तेजी लायी जाएगी।

वहीं, नैनीताल से जुड़ने वाले हल्द्वानी और कालाडूंगी मार्ग को आंशिक रूप से यातायात के लिए खोल दिया गया है। इन मार्गों से सोमवार को पूरी तरह जबकि मंगलवार को आशिंक तौर पर संपर्क टूट गया था। कुछ स्थानों पर भूस्खलन की आशंका के चलते नैनीताल-हल्द्वानी राष्ट्रीय राजमार्ग पर केवल हल्के वाहनों की आवाजाही बहाल की गई है।

भाषा

नेत्रपाल देवेंद्र

देवेंद्र