उत्तराखंडःगोलीबारी में मारे गए सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर की पत्नी ने आरोपपत्र दाखिल न होने पर दुख जताया

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उत्तराखंडःगोलीबारी में मारे गए सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर की पत्नी ने आरोपपत्र दाखिल न होने पर दुख जताया

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  • Publish Date - May 7, 2026 / 10:32 AM IST,
    Updated On - May 7, 2026 / 10:32 AM IST

(बुधवार को प्रसारित समाचार आवश्यक संपादन के साथ पुन: जारी)

देहरादून, सात मई (भाषा) देहरादून में दो पक्षों के बीच सड़क पर हुई गोलीबारी के दौरान मारे गए सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर मुकेश जोशी के परिवार ने घटना को एक माह से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद मामले में अब तक आरोपपत्र दाखिल नहीं होने पर नाखुशी जताई है।

जोशी 30 मार्च की सुबह मसूरी रोड पर जोहड़ी गांव में रोज की तरह सुबह की सैर पर निकले थे और इसी दौरान दो कार में सवार लोगों के बीच हुई गोलीबारी में गोली लगने से उनकी मौत हो गयी थी।

दिवंगत पूर्व सैन्य अधिकारी की पत्नी रेनू जोशी ने इस संबंध में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) के सचिव को पत्र लिखकर इस बात पर दुख जताया कि घटना को एक माह से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद पुलिस आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र अब तक दाखिल नहीं कर पाई है।

रेनू जोशी ने कहा, “घटना के बाद अधिकारियों व पुलिस से लेकर नेता और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक सबने आश्वासन दिया था कि वे हमारे साथ हैं और हमारी मदद की जाएगी लेकिन अब हम चक्कर लगा रहे हैं और कोई हमारी नहीं सुन रहा है।”

उन्होंने राज्य सरकार से एक करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग भी की।

रेनू ने 16 अप्रैल को लिखे पत्र में कहा कि 74 वर्षीय जोशी ने 36 साल तक भारतीय सेना में रहकर राष्ट्र की सेवा की और उन्हें उनके उल्लेखनीय साहस के लिए सेवा मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था।

रेनू ने 30 मार्च की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दिन हुए घटनाक्रम से दिवंगत जोशी का कोई संबंध नहीं था।

पत्र में उन्होंने यह भी लिखा है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 और 300 ए के तहत अपने नागरिकों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा करना राज्य सरकार का दायित्व है।

उन्होंने कहा, “कानून-व्यवस्था की विफलता के कारण एक निर्दोष नागरिक और सम्मानित पूर्व सैनिक की दिनदहाड़े सड़क पर हत्या कर दी गई, जिससे राज्य पर परिवार को हुए नुकसान की भरपाई करने का नैतिक और कानूनी दायित्व उत्पन्न होता है।”

रेनू जोशी ने कहा कि उनकी (सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर) कानूनी वारिस और निकटतम परिजन होने के नाते उत्तराखंड पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना 2011 के तहत प्राधिकरण उनके इस दावे पर शीघ्रता से प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दे।

उन्होंने पूर्व में इसी प्रकार के मिलते-जुलते मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि यह मामला उन उदाहरणों से कहीं ज्यादा मजबूत है, जहां 36 वर्षों तक राष्ट्र के लिए सेवा करने वाले एक पूर्व सैनिक सार्वजनिक हिंसा की एक आकस्मिक घटना में मारे गए, जिसमें उनकी कोई गलती नहीं थी।

रेनू जोशी ने पत्र में कहा, “राष्ट्र के प्रति उनकी (ब्रिगेडियर) विशिष्ट सेवा और उनकी मृत्यु की दुखद परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तथा स्थापित न्यायिक व प्रशासनिक मिसालों के अनुरूप उत्तराखंड सरकार मृतक के परिजनों को एक करोड़ रुपये का अनुग्रह मुआवजा प्रदान करे या प्रदान करने की सिफारिश करे।”

भाषा दीप्ति वैभव मनीषा

मनीषा