विहिप ने वंदे मातरम् के केवल दो अंतरे गाने के फैसले पर कांग्रेस पर निशाना साधा

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विहिप ने वंदे मातरम् के केवल दो अंतरे गाने के फैसले पर कांग्रेस पर निशाना साधा

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  • Publish Date - August 20, 2026 / 12:00 PM IST,
    Updated On - August 20, 2026 / 12:00 PM IST

नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने कांग्रेस के सभी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के केवल दो अंतरे गाए जाने के फैसले को लेकर बृहस्पतिवार को उस पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्षी दल ‘‘विदेशी मानसिकता’’ से प्रेरित है तथा तुष्टीकरण की राजनीति के बिना उसका अस्तित्व संभव नहीं।

कांग्रेस ने बुधवार को कहा था कि वह ‘वंदे मातरम्’ को लेकर 1937 में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और उस समय के अन्य प्रमुख नेताओं द्वारा किए गए फैसले का पूरी तरह पालन करेगी तथा इसी के अनुरूप पार्टी कार्यकर्ता राष्ट्रगीत के सिर्फ दो अंतरे ही गाएंगे।

पार्टी की शीर्ष नीति निर्धारक इकाई कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में इसे लेकर चर्चा हुई और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 1937 के सीडब्ल्यूसी के उस प्रस्ताव के कुछ अंश भी पढ़े जिसमें वंदे मातरम् के दो अंतरों के गायन का निर्णय लिया गया था।

विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा कर आरोप लगाया कि कांग्रेस ने बाकी चार अंतरे नहीं गाने का फैसला इसलिए किया है क्योंकि उनमें ऐसे शब्द हैं जिनका ‘‘भारतीय संस्कार, संस्कृति, पुरातन परंपराओं, आस्था, विश्वास और राष्ट्रीय मूल्यों से गहरा संबंध’’ है।

उन्होंने कहा, ‘‘शेष भाग में धर्म, मर्म, शक्ति, भक्ति, मंदिर, वाणी, विद्या और दुर्गा जैसे विशिष्ट शब्दों का प्रयोग होता है जो भारतीय संस्कार, संस्कृति, पुरातन परंपराओं, आस्था, विश्वास तथा राष्ट्रीय जीवन मूल्यों से सघन रूप से जुड़े हुए हैं।’’

बंसल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का राजनीतिक दृष्टिकोण भारत की सांस्कृतिक और सभ्यतागत पहचान के विपरीत है। उन्होंने कहा कि पार्टी ‘‘विदेशी मानसिकता’’ से प्रेरणा लेती है और भारतीय परंपराओं से जुड़े शब्दों को स्वीकार नहीं कर सकती।

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे शब्दों को विदेशी मानसिकता से प्रेरणा लेने वाली कांग्रेस भला कैसे अपना सकती थी। वैसे भी जिस फड़फड़ाती पतंग की डोर विदेशी मूल के एक व्यक्ति के हाथों में हो और जिहादी तुष्टीकरण के बिना जिस पार्टी का गुजारा ना हो तो, वह मरती, क्या न करती!

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने पार्टी मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान वंदे मातरम् के गायन के दौरान उसका ‘‘अपमान’’ किया।

बंसल ने राहुल गांधी, सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे का नाम लिए बिना उनकी ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘ स्वतंत्रता दिवस पर वंदे मातरम् को अपने मुख्यालय में पूरा बजाए जाने के बाद भी कांग्रेस ने इसके सिर्फ दो ही अंतरे गाने का निर्णय फिर से क्यों लिया और वहां तीनों ने उसका घोर अपमान क्यों किया?’’

बंसल ने कांग्रेस की राष्ट्र की ओर प्रतिबद्धता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वंदे मातरम् को लेकर पार्टी के रुख के बाद उससे अब भी सहानुभूति रखने वाले लोगों को अपने रुख पर पुनर्विचार करना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘जो पार्टी अपने राष्ट्रगीत की नहीं हुई वह अपने देश की भला कैसे हो सकती है। जनता को विचार करना पड़ेगा, खासकर उन राष्ट्र भक्तों को जिनके मन में उनके लिए थोड़ी बहुत सहानुभूति शेष है।’’

बंसल ने लोगों को भी वंदे मातरम् का अपमान करने को लेकर आगाह करते हुए कहा कि राष्ट्रगीत का अपमान करने पर जेल हो सकती है।

उन्होंने कहा, ‘‘स्मरण रहे कि आप राष्ट्रगीत ना गाएं तो चलेगा किंतु कहीं भी इसके गाए जाने पर उसका असम्मान या अपमान किया तो जेल जाने से आपको कोई नहीं बचा सकता। इन कांग्रेसियों के इस चक्कर में कोई ना फंसे तो अच्छा है, क्योंकि अब इस संबंध में कानून अधिसूचित हो चुका है।’’

भाषा सिम्मी रंजन

रंजन