विजयन ने स्वतंत्रता दिवस समारोह में पूरा ‘वंदे मातरम’ गाने के आदेश को वापस लेने की मांग की
विजयन ने स्वतंत्रता दिवस समारोह में पूरा ‘वंदे मातरम’ गाने के आदेश को वापस लेने की मांग की
कन्नूर, आठ अगस्त (भाषा) केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने शनिवार को मुख्य सचिव के उस आदेश को वापस लेने की मांग की, जिसमें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण गाने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एजेंडे के सामने झुक रही है।
विजयन ने संवाददाताओं के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण देश के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने दावा किया कि संविधान सभा ने तय किया था कि इस गीत के केवल शुरुआती छंद ही गाए जाने चाहिए।
विजयन ने कहा, “हमारे देश ने ‘वंदे मातरम’ के बारे में आम तौर पर एक बात स्वीकार की है। वह यह कि ‘वंदे मातरम’ पूरी तरह से धर्मनिरपेक्षता के अनुरूप नहीं है। जब हमने एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनने का फैसला किया, तो संविधान सभा ने खुद तय किया कि जो गीत धर्मनिरपेक्षता के अनुरूप नहीं है, उसे उस तरह से नहीं गाया जाना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती अंतरा गाने में कोई बुराई नहीं है।
विजयन ने कहा, “संविधान सभा ने तय किया था कि सिर्फ शुरुआती कुछ पंक्तियां ही गाई जानी चाहिए। पंडित जवाहरलाल नेहरू समेत विभिन्न नेताओं की यही नीति थी। कांग्रेस की नीति भी यही थी।”
उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के सत्ता में आने के बाद नीति बदल गई।
विजयन ने राज्य मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान पूरा ‘वंदे मातरम’ गाए जाने की ओर इशारा किया।
उन्होंने कहा, “यह बदलाव तब आया, जब नयी (यूडीएफ) सरकार सत्ता में आई। पहले ही दिन, मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान पूरा ‘वंदे मातरम’ गाया गया।”
विजयन ने कहा, “पूरा ‘वंदे मातरम’ गाना आरएसएस की नीति है। यह आरएसएस का एजेंडा है। यहां की सरकार ने इसके सामने पूरी तरह से झुक जाने का रवैया दिखाया। इसकी काफी आलोचना हुई।”
उन्होंने कहा कि ऐसी खबरों के बाद यह मुद्दा फिर से उठ खड़ा हुआ है कि 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान राष्ट्रगान के साथ-साथ ‘वंदे मातरम’ भी पूरा गाना होगा।
विजयन ने कहा, “अगर ऐसा है, तो यह गंभीर मामला है। यह आरएसएस की नीति है; हमारे देश ने इसे स्वीकार नहीं किया है। जब ‘वंदे मातरम’ गाने की बात आती है, तो केवल शुरुआती अंतर ही गाए जाने चाहिए।”
उन्होंने कहा, “शपथ ग्रहण समारोह से लेकर मौजूदा घटनाक्रमों तक हम देख सकते हैं कि वे आरएसएस के एजेंडे के सामने किस कदर झुक रहे हैं। अब जरूरत इस बात की है कि इस मामले में तुरंत सुधार किया जाए।”
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता पी राजीव ने मुख्य सचिव के आदेश को लेकर कांग्रेस नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार की आलोचना की।
उन्होंने शनिवार को एक फेसबुक पोस्ट में आरोप लगाया कि राज्य सरकार यह फैसला लेने से पहले केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के किसी संदेश का इंतजार कर रही थी।
राजीव ने सवाल किया, “अगर सरकार को केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुसार ही काम करना है, तो मुख्य सचिव ही काफी हैं। क्या मुख्यमंत्री और मंत्रियों के उन कुर्सियों पर बैठने की कोई जरूरत है?”
उन्होंने आरोप लगाया कि यूडीएफ सरकार ने बिना किसी विरोध के इस फैसले को स्वीकार कर लिया।
राजीव ने कहा, “इस मुद्दे पर कांग्रेस का राष्ट्रीय स्तर पर रुख यह है कि ‘वंदे मातरम’ को पूरा नहीं गाया जाना चाहिए। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या उस रुख में कोई बदलाव आया है। अगर कांग्रेस की नीति नहीं बदली है, तो मुख्यमंत्री वीडी सतीशन को बताना चाहिए कि वह अब किस पार्टी का हिस्सा हैं।”
उन्होंने इस निर्देश को लेकर कोई आपत्ति नहीं जताने के लिए इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) की भी आलोचना की।
केरल के मुख्य सचिव विश्वनाथ सिन्हा ने छह अगस्त को ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के बारे में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय से मिले संदेश के बाद एक पत्र जारी किया, जिसमें कहा गया कि ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के तहत 2022 में शुरू किए गए इस अभियान को 2026 में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने के देशव्यापी जश्न के साथ मनाया जाएगा।
पत्र में कहा गया कि इस दौरान होने वाले सभी कार्यक्रमों में पूरे ‘वंदे मातरम’ को सामूहिक रूप से गाने और राष्ट्रीय ध्वज फहराने का काम एक साथ किया जाएगा।
भाषा पारुल माधव
माधव

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