नयी दिल्ली, पांच मई (भाषा) पूर्वी दिल्ली के विवेक विहार इलाके में एक रिहायशी इमारत में आग लगने से नौ लोगों की मौत के बाद, स्थानीय लोगों ने सुरक्षा संबंधी गंभीर खामियों को दूर करने के लिए एकजुट होना शुरू कर दिया है और उन्होंने आवासीय भवनों में अग्नि सुरक्षा तैयारियों और संरचनात्मक परिवर्तनों पर चर्चा करने के लिए हर 15 दिन में बैठकें आयोजित करने का निर्णय लिया है।
विवेक विहार फेज-1 में तीन मई को चार मंजिला इमारत में आग लग गई और इसने पहली से चौथी मंजिल तक के फ्लैटों को अपनी चपेट में ले लिया। घटना में एक बच्चे सहित दो परिवारों के नौ लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य को बचा लिया गया।
प्रारंभिक जांच से पता चला है कि निचली मंजिल पर एयर कंडीशनर के फटने से आग लगी, जो तेज हवाओं के कारण और भी भड़क उठी।
इमारत का डिजाइन, भवन की छत के दरवाज़े पर ताला और पीछे की ओर लोहे की ग्रिल ने निकलने और बचाव प्रयासों में काफी बाधा डाली।
इस पृष्ठभूमि में, आस-पास के ब्लॉकों और इलाकों के निवासियों ने सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए चर्चा शुरू कर दी है।
स्थानीय निवासी राकेश सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘हमने तय किया है कि हर 15 दिन में बैठकें आयोजित की जाएंगी और आग लगने की किसी भी घटना के दौरान बचाव के कई तरीकों पर चर्चा की जाएगी।’
उन्होंने कहा कि बैठकों में इलेक्ट्रॉनिक डोर लॉकिंग सिस्टम से उत्पन्न होने वाले जोखिमों पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जो आपात स्थितियों के दौरान काम करना बंद कर देते हैं।
सिंह ने कहा, ‘हमें पता चला कि परिवार के कुछ सदस्य इलेक्ट्रॉनिक लॉकिंग सिस्टम के कारण इमारत से बाहर नहीं निकल पाए और जलकर मर गए।’
अन्य निवासी शिव शर्मा ने कहा, “यह एक अलिखित नियम है कि केवल ऊपरी मंजिलों में रहने वाले ही छत का उपयोग कर सकते हैं और वे छत को ताला लगाकर रखते हैं। आग लगने की घटना में भी ऐसा ही हुआ, क्योंकि ताला लगे होने के कारण कई लोग छत तक नहीं पहुंच पाए और वहीं उनकी मौत हो गई।”
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इमारत की छत सभी के लिए उपलब्ध हो, ताकि आपात स्थिति के दौरान जान बच सके।
शर्मा ने कहा, ‘अगर छतें बंद न होतीं, तो और भी जानें बचाई जा सकती थीं। बैठकों के दौरान हम इस मुद्दे को उठाएंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि छतों पर ताला न लगाया जाए ताकि आपात स्थिति में लोग वहां पहुंच सकें।’
एक अन्य निवासी ने कहा कि इतनी अधिक मौतों का एक प्रमुख कारण यह था कि इमारत के पीछे की तरफ पूरी तरह से ग्रिल लगी हुई थी, जिससे बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था।
उन्होंने कहा, ‘मैं बैठकों में व्यक्तिगत रूप से सुझाव दूंगा कि लोहे की ग्रिल को काटकर एक रास्ता या दरवाजा बनाया जाए, ताकि आपात स्थिति में लोग पीछे से बाहर निकलकर अपनी जान बचा सकें।’
आग बुझाने के लिए पहुंचे दमकलकर्मियों ने भी इसी तरह की चिंताएं जताईं और बताया कि फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए उन्हें लोहे की ग्रिल काटनी पड़ी। छत का बंद दरवाजा होने और बिजली गुल होने से बचाव कार्य और भी जटिल हो गया।
भाषा नोमान नोमान पवनेश
पवनेश