कोलकाता, 29 जुलाई (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने कहा है कि मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड और पैन कार्ड भारतीय नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं हैं।
अदालत ने यह टिप्पणी सुमन मोल्ला की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दौरान की। सुमन मोल्ला ने याचिका में दावा किया था कि उनके रिश्तेदार नासिर को पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बाद निरुद्ध केंद्र भेज दिया गया, जबकि नाम हटाने के खिलाफ अपील लंबित थी।
याचिकाकर्ता ने नासिर के मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड, आयकर विभाग द्वारा जारी पैन कार्ड और एक बैंक पासबुक का हवाला देते हुए दावा किया था कि वह भारतीय नागरिक है, विदेशी नहीं।
न्यायमूर्ति देबांग्शु बसाक और न्यायमूर्ति अजय कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने कहा कि मतदाता पहचान पत्र, आधार और पैन कार्ड भारतीय नागरिकता के निर्णायक प्रमाण नहीं हैं।
अदालत ने कहा कि मतदाता पहचान पत्र केवल यह साबित करता है कि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में दर्ज था। पीठ ने यह भी कहा कि नासिर का नाम वर्ष 2026 की एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटा दिया गया था।
अदालत ने यह भी कहा कि केवल बैंक खाता खुलवाना भारतीय नागरिकता का प्रमाण नहीं हो सकता। पीठ ने टिप्पणी की, “याचिकाकर्ता और हिरासत में लिये गए व्यक्ति, आव्रजन और विदेशी अधिनियम, 2025 के तहत निर्धारित प्रमाण पेश करने में असमर्थ रहे हैं।”
अदालत ने कहा कि ना तो याचिकाकर्ता और ना ही हिरासत में लिये गए व्यक्ति नासिर की भारतीय नागरिकता साबित कर सके, इसलिए वह अधिकारियों के फैसले में हस्तक्षेप करने की इच्छुक नहीं है और उसने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज कर दी।
पीठ ने कहा कि गृह मंत्रालय के दो मई, 2025 के परिपत्र के अनुसार नासिर को 18 जून, 2026 को हिरासत में लिया गया था और वह फिलहाल निरुद्ध केंद्र में बंद है।
अदालत ने बताया कि उक्त परिपत्र के तहत हिरासत में लिये गए व्यक्ति को अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए 60 दिन का समय दिया जाता है। उसने कहा कि फैसले की तारीख 20 जुलाई तक नासिर ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं कर सका, जिससे उसकी नागरिकता साबित हो सके।
पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील को राज्य सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई सुविधा के तहत नासिर से फोन पर बात करने की अनुमति भी दी।
अदालत ने कहा कि नासिर ने दावा किया कि उसके माता-पिता की मृत्यु भारत में हुई थी लेकिन वह अपने माता-पिता की कब्र के स्थल की जानकारी नहीं दे सका।
पीठ ने कहा, “हमने हिरासत में लिए गए व्यक्ति के माता-पिता के बारे में जानकारी मांगी थी, ताकि यदि याचिकाकर्ता सहमत हो तो डीएनए जांच के जरिए यह स्थापित किया जा सके कि उसके माता-पिता भारत में थे।”
केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि 18 जून, 2026 को नासिर के खिलाफ जारी हिरासत आदेश में दर्ज है कि उसकी नागरिकता की जांच, पूछताछ और सत्यापन के बाद उसे बांग्लादेशी नागरिक पाया गया।
भाषा अमित नरेश
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