क्षेत्रीय भाषाओं में जारी की जाती है भूस्खलन से लेकर मानव जनित आपदाओं तक की चेतावनी: सरकार

क्षेत्रीय भाषाओं में जारी की जाती है भूस्खलन से लेकर मानव जनित आपदाओं तक की चेतावनी: सरकार

क्षेत्रीय भाषाओं में जारी की जाती है भूस्खलन से लेकर मानव जनित आपदाओं तक की चेतावनी: सरकार
Modified Date: July 28, 2026 / 07:14 pm IST
Published Date: July 28, 2026 7:14 pm IST

नयी दिल्ली, 28 जुलाई (भाषा) हिमालय में भूस्खलन से लेकर शहरी इलाकों में औद्योगिक और मानव जनित आपदाओं तक, भारत की मोबाइल-आधारित आपदा चेतावनी प्रणाली क्षेत्रीय भाषाओं में ‘जियो-टारगेटेड’ चेतावनी देता है जो सभी मोबाइल नेटवर्क के उपयोगकर्ताओं तक पहुंचती है।

सरकार ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि ‘सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम’ का इस्तेमाल बहुत कम समय में आपदाओं के लिए समय पर चेतावनी जारी करने के लिए किया जाता है, जिसमें चक्रवाती तूफान, सुनामी, भारी बारिश, बिजली गिरना, अचानक बाढ़ आना, आंधी-तूफान, ओले, भूस्खलन, बादल फटना और औद्योगिक या मानव जनित आपदाएं शामिल हैं या वो घटनाएं शामिल हैं जिनके लिए तुरंत सार्वजनिक चेतावनी जारी करने की आवश्यकता होती है।

चेतावनी देने वाली एजेंसियां ​​‘जियो-टारगेटेड’ चेतावनी देती हैं, जिन्हें प्रभावित इलाकों में लोगों तक पहुंचाया जाता है।

​​‘जियो-टारगेटेड’ चेतावनी सिर्फ उसी क्षेत्र के मोबाइल फोन पर भेजी जाती हैं जहां आपदा या संकट आने की आशंका हो।

राय ने कहा कि यह प्रणाली राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) द्वारा लागू समान चेतावनी प्रोटोकॉल (सीएपी) पर आधारित एकीकृत चेतावनी प्रणाली के माध्यम से काम करती है।

भाषा वैभव हक

हक


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